नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ
पृष्ठ 148, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 148
- निक्षेप प्रकरण
स्वं द्रव्यं यत्र विश्रम्भात्निक्षिपत्यविशङ्कितः।
निक्षेपो नाम तत्प्रोक्तं व्यवहारपदं बुधैः ॥ 1 ॥
'निक्षेप' भी एक प्रकार का व्यवहार—लेन-देन से सम्बन्धित विषय—है।
अपनी किसी मूल्यवान् चल-अचल सम्पत्ति को किसी शंका, संशय अथवा सन्देह
के बिना, पूर्ण विश्वास के साथ किसी के पास रख देने का नाम ही 'निक्षेप' है।
टिप्पणी—नारदभाष्य के अनुसार निक्षेप शब्द का अर्थ है—‘“निःशंकम्
निक्षिप्यते स्थाप्यते इति निक्षेपः।’” अर्थात् निःशंक होकर (पूर्ण विश्वास रखकर)
अपनी कोई वस्तु किसी दूसरे को सौंपना अथवा उसके पास रखना ही निक्षेप है।
'व्यवहार प्रकाश' के अनुसार—निक्षेप एव ग्राहकस्यासमक्षं समर्पितो
न्यासः। अर्थात् बिना किसी साक्ष्य के अपनी सम्पत्ति किसी के पास रखने का नाम
निक्षेप है और इसी का दूसरा नाम न्यास है।
असहाय भाष्यकार के अनुसार—स्वं द्रव्यं यो निक्षिपति यच्च मतिवि-
स्त्रम्भादविशंकितो निक्षिपति। अनेनोक्तेनैतदुक्तं भवति किल यत्र अविश्वासात्
शंका भवति तत्र साक्षिलिखितग्रहणविरहितं कोऽपि वराटिकापि न ददाति।
यत्र पुनर्विश्वासात्निशंकः पुरुषो भवति तत्र साक्षिलिखितग्रहणवर्जितमेव सुवर्ण
सहस्त्रादिकमपि निक्षिपति।
अर्थात् जहां विश्वास नहीं होता, वहां व्यक्ति बिना लिखा-पढ़ी और गवाह
के किसी को एक कौड़ी भी देने को उद्यत नहीं होता। इसके विपरीत जहां विश्वास
होता है, वहां किसी को कानों-कान सूचना दिये बिना ही हज़ारों रुपये और
स्वर्णादि मूल्यवान् पदार्थ दे दिये जाते हैं। इस प्रकार निक्षेप का आधार है—
व्यक्ति-विशेष के प्रति मन में विश्वास का दृढ़ होना।
कुलजे वृत्तसम्पन्ने धर्मज्ञे सत्यवादिनि।
महापक्षे धनिन्यार्ये निक्षेपं निक्षिपेद्बुधः ॥ 2 ॥
निम्नोक्त सात गुणों से सम्पन्न व्यक्ति के पास ही निक्षेप का व्यवहार करना
चाहिए—1. कुलीन—श्रेष्ठ, निष्कलंक कुल में उत्पन्न व्यक्ति, 2. शुद्ध—पवित्र
चरित्रवान्, 3. धर्मात्मा, अर्थात् धर्म-विरुद्ध आचरण से भय खाने वाला, 4. सत्यवादी,
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