नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)
Narada Pancharatra Bharadwaja Samhita with Commentary
महर्षि भारद्वाज / देवर्षि नारद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दीटीकासहित ४९
अपने आराधनादि कर्मों की (प्रतिदिन की) समाप्ति पर उन्हें श्री भगवदर्पित करें।
मन्त्रों के आदि में तथा अन्त में व्यापक का अन्तर योजित करें॥४॥
प्रातरुत्थाय विधिवत् स्नात्वा नित्यं समाहितः ।
यजेत कर्मभिस्तैस्तैर्विष्णुं देवादिसंज्ञितम् ॥५॥
फिर वह ब्राह्म मुहूर्त में (प्रातःकाल) उठे तथा विधिपूर्वक स्नान कर आगे विहित
सन्ध्यावन्दनादि कर्म सम्पन्न कर एकाग्रभाव से विविध देव नामों वाले व्यापक
श्रीविष्णु की उन उन विहित विधियों के साथ अर्चना करें॥५॥
ततश्च देवदेवेशं भोगैरभ्यर्चयेद् हरिम् ।
अशुद्धवर्जं सकलैः परिचारैः समन्वितम् ॥६॥
फिर देवों के अधिपति श्रीविष्णु की गन्ध-पुष्प नैवेद्यादि भोग्य पदार्थों के द्वारा
परिचर्या कर अर्चना करें। इनमें अशुद्ध देवादि परिवारों को हटाते हुए सभी
परिचर्या रखी जावे¹॥६॥
पूर्वमेव यथान्यायमभिगम्य जगद्गुरुम् ।
उपादाय च योगार्थान् सम्भारान्नियतः स्वयम् ॥७॥
यजेत पुरुषं साक्षाद् यथेच्छं प्रतिमादिषु ।
पञ्चरात्रेण विधिना गुर्वधीनोऽपरेण च ॥८॥
इस क्रम में सर्वप्रथम आचारादि का अनुसरण कर यथाविधान जगद्गुरु के समीप
जाकर योग साधनों को ग्रहण करने के संकल्पों से नियत चित्त होते हुए उन सामग्री
को रखकर फिर यथेच्छ भाव से साक्षात् शिला में या प्रतिमादि मे स्थित श्री हरि की
अपने पूज्य गुरु के अधीन पञ्चरात्र प्रोक्त आगम के विधानानुसार अथवा श्रुति,
स्मृति या पुराणादि में कथित विधि का अनुसरण करते हुए स्वयं अर्चना
करे॥७-८॥
ब्राह्मणैः क्षत्रियैर्वैश्यैः शूद्रैः स्त्रीभिस्तथा परैः ।
यथार्हमर्च्यः सेव्यश्च नित्यं सर्वेश्वरो हरिः ॥९॥
प्रतिदिन अपनी स्थिति तथा भावना के अनुरूप ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों, शूद्रों,
स्त्रियों तथा अन्य अनुलोमादि सभी जातियों के द्वारा नित्य सर्वजगदधिपति श्री
हरि की पूजा की जानी चाहिए²॥९॥
१ आशय यही कि अन्य देव परिवार या पंचायतन में स्थित श्रीविष्णु की सम्मिलितरूप में अर्चना
के बजाय केवल श्रीविष्णु की केन्द्रीभूत अर्चना का विधान यथाशक्य सम्पन्न करना
चाहिए।
२ श्रीहरि की अर्चना नित्य क्रिया है। कहा भी है कि—'नित्यं सदा यावदायुर्र्न कदाचिदतिक्रमेत्' ।
अर्चन श्रीविष्णु का या पादुकादि का जैसी भी स्थिति हो करना चाहिए।