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नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

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( २७६ )
'नन्दन्ति काव्यानि कवीन्द्रवर्गाः
कुशीलवाः पारिषदाश्च सन्तः ।
यस्मादलं सज्जनसिन्धुहंसी
तस्मादियं सा कथितेह नान्दी ॥'
कभी इससे देवता के अतिरिक्त ब्राह्मण तथा राजादिकों की
भी आशीर्वाद-युक्त स्तुति की जाती है:—
“आशीर्वचन संयुक्ता स्तुतिर्यस्मात्प्रयुज्यते ।
देवद्विजनृपादीनां तस्मान्नान्दीति संज्ञिता ।”
२. सूत्रधार — सूत्रधार का शब्दार्थ है 'सूत्र को धारण करने
वाला', 'शिल्पी', अथवा 'गृहकार' । नाटक में सूत्रधार एक
विशेष पात्र होता है जो नाटक के खेले जाने का प्रबन्ध करता
है ।
प्रस्तावना अथवा स्थापना में आकर सूत्रधार नाटक की
कथावस्तु, अथवा नाटककार, अथवा नायक के गुणों की सूचना
देता है । और वह रङ्गमञ्च को सजाने में भी बड़ा चतुर होता
है ।:—
“आसूत्रयन् गुणान् नेतुः कवेरपि च वस्तुनः ।
रङ्गप्रसाधनप्रौढः सूत्रधार इहोदितः ॥”
३. नेपथ्य — इस शब्द की व्युत्पत्ति सन्दिग्ध है। इसका अर्थ है
किसी पात्र के कपड़े अथवा वेष-भूषा । विस्तृत रूप में इसका
अर्थ पात्रों के 'वस्त्र पहिनने का कमरा' हो जाता है जिसे
रंगमञ्च से एक पर्दे के द्वारा पृथक् किया जाता है ।:—