मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९० मुहूर्त्तचिन्तामणि
अन्वयः—क्षौरभे तथा पञ्चमे पञ्चमे दिने वा अस्य (नक्षत्रस्य) उदये (मुहूर्त्ते)
नृपाणां श्मश्रुकर्म हितम् । तथा षडग्निः त्रिर्मैत्रः, अष्टकः, पञ्चपित्र्यः, अब्ध्यर्यमा,
क्षौरकृत् अब्दतः मृत्युं एति ॥ ३६ ॥
साधारण क्षौरकर्म के लिए कहे हुए नक्षत्रों में पाँचवें दिन दाढ़ी के बाल
बनवाना राजाओं का हितकारक होता है । अब सर्वथा क्षौर में त्याज्य नक्षत्र
कहते हैं । कृत्तिका नक्षत्र में छः बार, अनुराधा में तीन बार, रोहिणी में
आठ बार, मघा में पाँच बार, उत्तराफाल्गुनी में चार बार बाल बनवाने-
वाला पुरुष एक वर्ष के अनन्तर मृत्यु को प्राप्त होता है ॥ ३६ ॥
अक्षरारम्भ का मुहूर्त्त
गणेशविष्णुवाग्रमाः प्रपूज्य पञ्चमाब्दके
तिथौ शिवार्कदिक्द्विषट्शरत्रिके रवावुदक् ।
लघुश्रवोनिलान्त्यभादितीशतक्षमित्रभे
चरोनसत्तनौ शिशोर्लिपिग्रहः सतां दिने ॥ ३७ ॥
अन्वयः—पञ्चमाब्दके, शिवार्कदिग्द्विषट्शरत्रिके तिथौ रवौ उदक् लघुश्रवोऽनिला-
न्त्यभादितीशतक्षमित्रभे, चरोनसत्तनौ, सतां दिने, गणेशविष्णुवाग्रमाः प्रपूज्य, शिशोः
लिपिग्रहः शुभः स्यात् ॥ ३७ ॥
जन्म से पाँचवें वर्ष में, एकादशी, द्वादशी, दशमी, दुइज, छठि, पञ्चमी
वा तीज तिथि में; उत्तरायण में सूर्य के रहते; हस्त, अश्विनी, पुष्य, श्रवण,
स्वाती, रेवती, पुनर्वसु, आर्द्रा, चित्रा या अनुराधा नक्षत्र में; चर अर्थात्,
मेष, कर्क, तुला और मकर को छोड़ शुभग्रहों के लग्न में; शुभ ग्रहों के दिन
में; गणेश, विष्णु, सरस्वती और लक्ष्मी की पूजा करके बालक का
अक्षरारम्भ शुभ होता है ॥ ३७ ॥
विद्यारम्भ का मुहूर्त्त
मृगात्कराच्छूतेस्त्रयेऽशिवमूलपूर्विकात्रये
गुरुद्वयेऽर्कजीववित्सितेऽह्नि षट्शरत्रिके ।
शिवार्कदिग्द्विके तिथौ ध्रुवान्त्यमित्रभे परैः
शुभैरधीतिरुत्तमा त्रिकोणकेन्द्रगैः स्मृता ॥ ३८ ॥
अन्वयः—मृगात् करात् श्रुतेः त्रये गुरुद्वये, अर्कजीववित्सिते अह्नि, षट्शरत्रिके
शिवार्कदिग्द्विके तिथौ, परैः ध्रुवान्त्यमित्रभे, शुभैः त्रिकोणकेन्द्रगैः अधीतिः उत्तमा
स्मृता ॥ ३८ ॥