मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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अन्वयः—पञ्चमासाधिके मातुः गर्भे शिशोः चौलं न सत् । पञ्चवर्षाधिकस्य शिशोः
मातरि गर्भिण्यां अपि चौल इष्टं स्यात् ।। ३१ ।।
यदि माता के पाँच महीने से अधिक दिनों का गर्भ हो तो बालक का
मुण्डन शुभ नहीं होता और यदि पाँच वर्ष से अधिक दिनों का बालक हो
गया हो तो माता के गर्भवती रहते भी मुण्डन शुभ होता है ।। ३१ ।।
तारादोष का अपवाद
तारादौष्ट्येऽब्जे त्रिकोणोच्चगे वा क्षौरं सत्स्यात्सौम्यमित्रस्ववर्गे ।
सौम्ये भेऽब्जे शोभने दुष्टतारा शस्ता ज्ञेया क्षौरयात्रादिकृत्ये ।। ३२ ।।
अन्वयः—तारादौष्ट्ये (अपि) अब्जे (चन्द्रे) त्रिकोणोच्चगे वा सौम्यमित्रस्ववर्गे
(स्थिते) क्षौरं सत् स्यात् । शोभने अब्जे सौम्ये भे (सति) क्षौरयात्रादिकृत्ये दुष्टतारापि
शस्ता ज्ञेया ।। ३२ ।।
यदि तारा दुष्ट भी हो, अर्थात् पहिली, तीसरी, पाँचवीं, सातवीं भी हो
और चन्द्रमा नवें या पाँचवें या अपने उच्चस्थान में, अथवा बुध, बृहस्पति,
शुक्र के षड्वर्ग में, अथवा अपने ही षड्वर्ग में स्थित हो तो मुण्डन शुभ
होता है । विहित शुभ नक्षत्र हों, चन्द्रमा गोचर से शुभ हो, अर्थात्
जन्मराशि से चौथे, छठे, आठवें, बारहवें स्थान को छोड़ अन्य स्थान
में स्थित हो तो दुष्ट भी तारा मुण्डन और यात्रा आदि में शुभ हो
जाती है ।। ३२ ।।
मुण्डनादि कार्यों में निषिद्ध काल
ऋतुमत्याः सूतिकायाः सूनोश्चौलादि नाचरेत् ।
ज्येष्ठापत्यस्य न ज्येष्ठे कैश्चिन्मार्गेऽपि नेष्यते ।। ३३ ।।
अन्वयः—ऋतुमत्याः सूतिकायाः सूनोः चौलादि न आचरेत् । ज्येष्ठापत्यस्य ज्येष्ठे
चौलं न आचरेत् । कैश्चित् मार्गेऽपि न इष्यते ।। ३३ ।।
जब माता रजस्वला हो, अथवा माता के लड़की हुए महीने से कम
अथवा लड़का हुए बीस दिन से कम दिन बीते हों तो लड़के का मुण्डनादि
संस्कार न करे । जेठे लड़के और जेठी लड़की का ज्येष्ठ महीने में विवाहादि
शुभ कार्य न करे । कोई आचार्य अगहन में भी जेठे लड़के और लड़की के
विवाहादि संस्कार को निषिद्ध कहते हैं ।। ३३ ।।