मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६६ मुहूर्तचिन्तामणि
स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और यदि चौथे स्थान में कोई ग्रह स्थित
हों तो विद्ध हो जाता है ॥ २ ॥ ऐसे ही दूसरे स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ
और यदि बारहवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे
ही नवें स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और यदि दशवें स्थान में कोई ग्रह स्थित
हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही दूसरे स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और
यदि तीसरे स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही
गेरहवें स्थान में स्थित बृहस्पति शुभ और यदि तीसरे स्थान में कोई ग्रह
स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। जन्मराशि से पहिले स्थान में स्थित शुक्र
शुभ और यदि आठवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है।
ऐसे ही दूसरे स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि सांतवें स्थान में कोई ग्रह
स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही तीसरे स्थान में स्थित शुक्र शुभ
और यदि पहिले स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही
चौथे स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि दशवें स्थान में कोई ग्रह स्थित
हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही पाँचवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और
यदि नवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही
आठवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि पाँचवें स्थान में कोई ग्रह स्थित
हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही नवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि
गेरहवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है। ऐसे ही बारहवें
स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि छठे स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो
विद्ध हो जाता है। ऐसे ही गेरहवें स्थान में स्थित शुक्र शुभ और यदि तीसरे
स्थान में कोई ग्रह स्थित हों तो विद्ध हो जाता है ॥ ३ ॥
वामवेध और शुक्लपक्ष में चन्द्रमा का बल
दुष्टोऽपि खेटो विपरीतवेधाच्छुभो द्विकोणे शुभदः सितेऽब्जः ॥ ४ ॥
अन्वयः—(तथा) दुष्टः अपि खेटः विपरीतवेधात् शुभः (स्यात्) । तथासिते
[शुक्लपक्षे ] अब्जः द्विकोणे शुभदः स्यात् ॥ ४ ॥
अशुभ भी ग्रह विपरीत वेध से शुभ हो जाता है, अर्थात् जन्मराशि से
बारहवें, चौथे, नवें, पाँचवें स्थान में स्थित सूर्य अशुभ होता है परन्तु यदि
छठे, दशवें, तीसरे, गेरहवें स्थान में कोई ग्रह स्थित हो तो शुभ हो जाता
है। ऐसे ही नवें, पाँचवें, बारहवें स्थान में स्थित मङ्गल, शनैश्चर, राहु,
केतु ये ग्रह अशुभ होते हैं, परन्तु छठे, गेरहवें, तीसरे स्थान में स्थित किसी