मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंक्रान्तिप्रकरण ५७
अन्वयः—यदि पूर्णे निशीथे संक्रमः स्यात् (तदा) दिनद्वयं पुण्यं, अथ उदयास्तात्
पूर्वं परस्तात् यदि याम्यसौम्यायने (संक्रान्ती भवतः) (तदा) तु परे पूर्वदिने पुण्ये
(स्याताम्) ।। ६ ।।
यदि ठीक आधी रात्रि में संक्रान्ति हो तो पूर्व और पर दोनों दिन
पुण्यकाल होता है। यदि सूर्योदय से पूर्व कर्क संक्रान्ति हो तो पूर्व ही दिन
सम्पूर्ण पुण्यकाल और सूर्यास्त के बाद मकर संक्रान्ति हो तो पर ही दिन
सम्पूर्ण पुण्यकाल होता है ।। ६ ।।
सन्ध्याकाल का प्रमाण
सन्ध्या त्रिनाडीप्रमितार्कबिम्बादधोदितास्तादध ऊर्ध्वमत्र ।
चेद्याम्यसौम्ये अयने क्रमात्तस्तः पुण्यौ तदानीं परपूर्वघस्रौ ।। ७ ।।
अन्वयः—अर्द्धोदितास्तात् अर्कबिम्बात् अधः ऊर्ध्वं त्रिणाडीप्रमिता सन्ध्या
(कथिता) अत्र चेद्याम्यसौम्ये अयने (संक्रमणे भवतः) तदानी परपूर्वघस्रौ पुण्यौ
स्तः ।। ७ ।।
सूर्य का आधा बिम्ब उदय होने से पूर्व तीन दण्ड प्रातः सन्ध्या और
आधा बिम्ब अस्त होने के बाद तीन दण्ड सायं सन्ध्या जानना चाहिए।
यदि प्रातःसन्ध्या में कर्क संक्रान्ति हो तो सूर्योदय के अनन्तर सम्पूर्ण दिन
पुण्यकाल और यदि सायंसन्ध्या में मकर संक्रांति हो तो सूर्यास्त से पूर्व
सम्पूर्ण दिन पुण्यकाल होता है ।। ७ ।।
संक्रान्तियों का विशेष पुण्यकाल
याम्यायने विष्णुपदे चाद्या मध्यास्तुलाजयोः ।
षडशीत्यानने सौम्ये परा नाड्योऽतिपुण्यदाः ।। ८ ।।
अन्वयः—याम्यायने विष्णुपदे च आद्याः नाड्यः, तुलाजयोः मध्याः नाड्यः,
षडशीत्यानने (तथा) सौम्ये पराः नाड्यः अतिपुण्यदाः (भवन्ति) ।। ८ ।।
कर्क, वृष, सिंह, वृश्चिक और कुम्भ संक्रान्ति जिस समय हो उससे
पूर्व सोलह दण्ड पुण्यकाल होता है। तुला और मेष संक्रान्ति जिस समय हो
उससे पूर्व सोलह दण्ड और पर सोलह दण्ड मिलकर बत्तिस दण्ड अथवा
पूर्व आठ और पर आठ मिलकर सोलह दण्ड पुण्यकाल होता है। मिथुन,
कन्या, धनु, मीन और मकर संक्रान्ति जिस समय हो उससे पर सोलह दण्ड
पुण्यकाल होता है ।। ८ ।।