मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२ मुहूर्तचिन्तामणि
पाँच ताराओं का, आर्द्रा का एक तारा का, पुनर्वसु का चार ताराओं का,
पुष्य का तीन ताराओं का, आश्लेषा का पाँच ताराओं का, मघा का पाँच
ताराओं का, पूर्वाफाल्गुनी का दो ताराओं का, उत्तराफाल्गुनी का दो ताराओं
का, हस्त का पाँच ताराओं का, चित्रा का एक तारा का, स्वाती का एक
तारा का, विशाखा का चार ताराओं का, अनुराधा का चार ताराओं का,
ज्येष्ठा का तीन ताराओं का, मूल का गेरह ताराओं का, पूर्वाषाढ़ का दो
ताराओं का, उत्तराषाढ़ का दो ताराओं का, अभिजित् का तीन ताराओं का,
श्रवण का तीन ताराओं का, धनिष्ठा का चार ताराओं का, शतभिष का सौ
ताराओं का, पूर्वाभाद्रपद का दो ताराओं का, उत्तराभाद्रपद का दो ताराओं
का और रेवती का स्वरूप बत्तिस ताराओं का है ॥ ५७ ॥
अश्विन्यादि नक्षत्रों का रूप
अश्व्यादिरूपं तुरगास्ययोनिक्षुरोनएणास्यमणीगृहं च ।
पृषत्कचक्रे भवनं च मञ्चः शय्याकरो मौक्तिकविद्रुमं च ॥ ५८ ॥
तोरणं बलिनिभं च कुण्डलं सिंहपुच्छगजदन्तमञ्चकाः ।
त्र्यस्रि च त्रिचरणाभमर्दलो वृत्तमञ्चयमलाभमर्दलाः ॥ ५९ ॥
अन्वयः—तुरगास्ययोनिक्षुरः, अनः, एणास्यमणिः, गृहं च, पृषत्कचक्रे भवनं च,
मञ्चः, शय्या, करः, मौक्तिकविद्रुमं च, तोरणं, बलिनिभं च, कुण्डलं, सिंहपुच्छगजदन्त-
मञ्चकाः, त्र्यस्रि च, त्रिचरणाभमर्दलः, वृत्तमञ्चयमलाभमर्दलाः [एतत्] अश्व्यादिरूपं
(ज्ञेयम्) ॥ ५८-५९ ॥
घोड़े के मुख के सदृश अश्विनी, योनि के सदृश भरणी, छुरा के सदृश
कृत्तिका, गाड़ी के सदृश रोहिणी, हरिण के मुख के सदृश मृगशिरा,
मणि के सदृश आर्द्रा, घर के सदृश पुनर्वसु, बाण के सदृश पुष्य, चक्राकार
आश्लेषा, घर के समान मघा, मचान के सदृश पूर्वाफाल्गुनी, खाट के
सदृश उत्तराफाल्गुनी, हाथ के सदृश हस्त, मोती के सदृश चित्रा, मूंगा
के सदृश स्वाती, तोरण के सदृश विशाखा, भात के ढेर के सदृश अनुराधा,
कुण्डल के सदृश ज्येष्ठा, सिंह की पूँछ के सदृश मूल, हाथी-दाँत के सदृश
पूर्वाषाढ़, मचान के सदृश उत्तराषाढ़, त्रिकोणाकार अभिजित्, वामन
भगवान् के सदृश श्रवण, नगाड़ा के सदृश धनिष्ठा, मण्डलाकार शतभिष,
मचान के सदृश पूर्वाभाद्रपद, जुड़े हुए दो नक्षत्र उत्तराभाद्रपद और नगाड़ा
के सदृश रेवती है ॥ ५८-५९ ॥