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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 49

४० मुहूर्त्तचिन्तामणि
[भानि] असत्, शुभकराणि, उप्तौ प्रोक्तानि । हले अर्कोज्झिताङ्घ्रात् रामाष्टनवाष्टभानि,
असत्सन्ति, मुनिभिः प्रोक्तानि ॥ २६ ॥
श्रवण, शतभिष, पुनर्वसु और विशाखा नक्षत्र तथा मंगल दिन को
छोड़ पूर्वोक्त हलप्रवाह-मुहूर्त्त में बीज बोना शुभदायक है। जिस नक्षत्र में
राहु स्थित हो उस नक्षत्र से आठ नक्षत्र बीज बोने में अशुभ, फिर तीन
शुभ, फिर एक अशुभ, फिर तीन शुभ, फिर एक अशुभ, फिर तीन
शुभ, फिर एक अशुभ, फिर तीन शुभ, और उसके बाद चार अशुभ होते
हैं ॥ २९ ॥
राहुभात् फणिचक्र

८३१३१३१३४
अशुभशुभअशुभशुभअशुभशुभअशुभशुभअशुभ
पहिले-पहिल हल चलाने के लिए सूर्यभुक्त अर्थात् जिस नक्षत्र में सूर्य
वर्त्तमान हो उस नक्षत्र के पूर्व नक्षत्र से लेकर तीन नक्षत्र पर्यन्त अशुभ,
चौथे से लेकर गेरहवें तक शुभ, बारहवें से लेकर बीसवें तक अशुभ और
इक्कीसवें से लेकर अट्ठाइसवें तक शुभ मुनियों ने कहा है ॥ २९ ॥
सूर्यभुक्तभात् हलचक्र
३८९८
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अशुभशुभअशुभशुभ
शिरामोक्ष व विरेकादि व धर्मक्रिया के मुहूर्त्त
त्वाष्ट्रान्मित्रकभाद्द्वयेऽम्बुपलघुश्रोत्रे शिरामोक्षणं
भौमार्कैज्यदिने विरेकवमनाद्यं स्याद्बुधार्कौ विना ।
मित्रक्षिप्रचरध्रुवे रविशुभाहे लग्नवर्गे विदो
जीवस्यापि तनौ गुरौ निगदिता धर्मक्रिया तद्बले ॥ ३० ॥
अन्वयः—त्वाष्ट्रान्मित्रकभाद्द्वयेऽम्बुपलघुश्रोत्रे, भौमार्कैज्यदिने शिरामोक्षणम्
(कार्यम्) । बुधार्कौ विना [पूर्वोक्तनक्षत्रेषु] विरेकवमनाद्यं (शुभं) स्यात् । मित्र-
क्षिप्रचरध्रुवे, रविशुभाहे, विदः जीवस्य अपि लग्नवर्गे, गुरौ तनौ, तद्बले [गुरुबले]
धर्मक्रिया (शुभा) निगदिता ॥ ३० ॥