मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशुभाशुभप्रकरण १५
निन्दित योगों का परिहार
कुयोगास्तिथिवारोत्थास्तिथिभोत्था भवारजाः ।
हूणवङ्गखशेष्वेव वर्ज्यास्त्रितयजास्तथा ॥ ३१ ॥
अन्वयः—तिथिवारोत्थाः, तिथिभोत्थाः, भवारजाः, तथा त्रितयजाः, कुयोगाः
हूणवंगखशेषु (देशेषु) एव वर्ज्याः ॥ ३१ ॥
तिथि-वार के योग से, तिथि-नक्षत्र के योग से, नक्षत्र-वार के योग से
और तिथि-वार-नक्षत्र इन तीनों के योग से जितने कुयोग कहे हैं वे सब हूण
देश, वंग देश और खश देश में ही वर्जनीय हैं, अन्य देशों में नहीं ॥ ३१ ॥
सम्पूर्ण कृत्यों में वर्जनीय वस्तुएँ
सर्वस्मिन्विधुपापयुक्तनुलवावद्धं निशाह्नोर्घटी-
त्र्यंशं वै कुनवांशकं ग्रहणतः पूर्वं दिनानां त्रयम् ।
उत्पातग्रहतोऽद्रचहांश्च शुभदोत्पातैश्च दुष्टं दिनं
षण्मासं ग्रहभिन्नभं त्यज शुभे यौद्धं तथोत्पातभम् ॥ ३२ ॥
अन्वयः—विधुपापयुक्तनुलवौ, निशाह्नोः अर्धे [मध्ये] घटीत्र्यंशं, वै (निश्चयेन)
कुनवांशकं, ग्रहणतः पूर्वं दिनानां त्रयं, उत्पातग्रहतः अद्रचहान्, शुभदोत्पातैः दुष्टं दिनं,
सर्वस्मिन् शुभे त्यज । ग्रहभिन्नभं यौद्ध (भं), तथा उत्पातभं षण्मासं (यावत्)
सर्वस्मिन् शुभे त्यज ॥ ३२ ॥
चन्द्रमा, सूर्य, मंगल, शनैश्चर, राहु और केतु से युक्त लग्न, और नवांश;
आधी रात और मध्याह्न में बीस-बीस पल (दस पहिले और दस पीछे);
पापग्रह का नवांश; सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण से पूर्व तीन दिन, भूकम्प आदि
उत्पात और चन्द्र-सूर्य-ग्रहण के पश्चात् सात दिन तथा शुभद उत्पात का दिन,
इन सब को शुभ कार्यों में त्याग दे । मंगलादि पाँच ग्रहों से भेद को प्राप्त हुआ
नक्षत्र, जिस नक्षत्र में मंगलादि पापग्रहों का युद्ध हुआ हो वह नक्षत्र, जिस
नक्षत्र में कोई उत्पात हुआ हो वह नक्षत्र, इन सबको सम्पूर्ण शुभ कार्यों में
छः महीने तक त्याग करे। उत्पात और शुभदोत्पात—इन दोनों में यह
भेद है कि जो वसन्तादि ऋतुओं में बिजली गिरना आदि वराहमिहिर ने
कहा है वे तो शुभदोत्पात हैं और वही उक्त ऋतुओं को छोड़ अन्य ऋतुओं
में होने से उत्पात कहे जाते हैं। ग्रह-युद्ध चार प्रकार का है—उल्लेख १
भेद २ अंशुविमर्द ३ अपसव्य ४ । मंगलादि ग्रहों का परस्पर स्पर्श
उल्लेख कहा जाता है । जब एक ग्रह दूसरे ग्रह को ढक ले तब