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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 203

१९४ मुहूर्त्तचिन्तामणि
अन्वयः—शशिजे रिपुलग्नकर्महिबुके (स्थिते) शुभनभोगमनैः परिवीक्षिते, अशुभ-
नामधरैः (पापैः) व्ययलग्नमन्मथगृहेषु परिवर्जितेषु [स्थानेषु] स्थितैः (जयः
स्यात्) ॥ ७१ ॥
अथवा शुभग्रहों से दृष्ट बुध छठे या लग्न या दशवें या चौथे स्थान में
हो और लग्न, बारहवें, सातवें इन स्थानों को छोड़ अन्यत्र शुभग्रह स्थित हों,
ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा की जय होती है ॥ ७१ ॥
लग्ने यदि जीवः पापा यदि लाभे कर्मण्यपि चेद्राज्याधिगमः स्यात् ।
द्यूने बुधशुक्रौ चन्द्रो हिबुके वा तद्वत्फलमुक्तं सर्वैर्मुनिवर्यैः ॥ ७२ ॥
अन्वयः—यदि जीवः लग्ने, यदि पापाः लाभे अपि वा कर्मणि चेत् (तदा) राज्या-
धिगमः स्यात् । वा बुधशुक्रौ द्यूने, चन्द्रः हिबुके (तदा) सर्वैः मुनिवर्यैः तद्वत् फलं
उक्तम् ॥ ७२ ॥
अथवा यदि लग्न में बृहस्पति हो और पापग्रह गेरहवें, दशवें इन दोनों
स्थानों में हों, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा को राज्य मिलती है।
अथवा बुध, शुक्र ये दोनों सातवें स्थान में हों और चन्द्रमा चौथे स्थान में हो,
ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा को भी राज्य मिलती है ॥ ७२ ॥
रिपुतनुनिधने शुक्रजीवेन्दवो ह्यथ बुधभृगुजौ तुर्यगेहस्थितौ ।
मदनभवनगश्चन्द्रमा वाम्बुगः शशिसुतभृगुजान्तर्गतश्चन्द्रमाः ॥ ७३ ॥
अन्वयः—शुक्रजीवेन्दवः रिपुतनुनिधने (स्थिताः) (तदा जयः स्यात्) वा बुधभृगुजौ
तुर्यगेहस्थितौ, चन्द्रमाः मदनभवनगः (तदा जयः स्यात्) ॥ ७३ ॥
अथवा लग्न में बृहस्पति, छठे स्थान में शुक्र, आठवें स्थान में चन्द्रमा
हो, अथवा बुध, शुक्र ये दोनों चौथे स्थान में और चन्द्रमा सातवें स्थान में
हो, अथवा चन्द्रमा चौथे स्थान में स्थित होकर बुध और शुक्र के मध्य में हो,
इन योगों में की हुई यात्रा जयकारिणी होती है ॥ ७३ ॥
सितजीवभौमबुधभानुतनूजास्तनुमन्मथारिहिबुकत्रिगृहे चेत् ।
क्रमतोरिसोदरखशात्रवहोराहिबुकआयगैर्गुरुदिनेऽखिलखेटैः ॥ ७४ ॥
अन्वयः—चेत् सितजीवभौमबुधभानुतनूजाः क्रमतः तनुमन्मथारिहिबुकत्रिगृहे
(स्थिताः) वा गुरुदिने अखिलखेटैः [सूर्याद्यैः] क्रमतः अरिसोदरखशात्रवहोराहिबुकआयगैः
(तदा जयः स्यात्) ॥ ७४ ॥
अथवा लग्न में शुक्र, सातवें बृहस्पति, छठे मंगल, चौथे बुध, और तीसरे
स्थान में शनैश्चर हो, अथवा बृहस्पति के दिन छठे स्थान में सूर्य, तीसरे