सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 207 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 190

यात्राप्रकरण १८१
अन्वयः-भूमिद्वयब्ध्यद्रिदिक्सूर्याङ्गाष्टांकेशाग्निशायकाः (क्रमात्) मेषादिघात-
लग्नानि सुधीः यात्रायां वर्जयेत् ॥ ३४ ॥
मेष राशिवालों को मेष, वृषराशिवालों को वृष, मिथुन राशिवालों को
कर्क, कर्क राशिवालों को तुला, सिंह राशिवालों को मकर, कन्या राशिवालों
को मीन, तुला राशिवालों को कन्या, वृश्चिक राशिवालों को वृश्चिक, धनु
राशिवालों को धनु, मकर राशिवालों को कुम्भ, कुम्भ-राशिवालों को मिथुन,
मीन राशिवालों को सिंह लग्न घातक है। पण्डित को चाहिए कि यात्रा में
इन लग्नों का त्याग करे ॥ ३४ ॥
घातलग्न चक्र

मे०वृ०म०क०सिं०कं०तु०वृ०ध०म०कुं०मी०राशि
मे०वृ०क०तु०म०मी०कं०वृ०ध०कुं०मि०सिं०घातलग्न

कालपाश योग
कौबेरीतो वैपरीत्येन कालो वारेऽर्काद्य सम्मुखे तस्य पाशः ।
रात्रावेतौ वैपरीत्येन गण्यौ यात्रायुद्धे सम्मुखे वर्जनीयौ ॥ ३५ ॥
अन्वयः-कौबेरीतः (उत्तरदिशमारभ्य क्रमेण) अर्काद्ये वारे कालः (स्यात्) तस्य
सम्मुखे पाशः (स्यात्) एतौ [कालपाशौ] रात्रौ वैपरीत्येन गण्यौ (तौ) यात्रायुद्धे
सम्मुखे वर्जनीयौ ॥ ३५ ॥
रविवार आदि में उत्तर दिशा से लेकर विपरीतक्रम से काल रहता है,
अर्थात् रविवार के दिन उत्तर में, सोमवार के दिन वायव्य में, मंगल के दिन
पश्चिम में, बुध के दिन नैर्ऋत्य में, बृहस्पति के दिन दक्षिण में, शुक्र के दिन
आग्नेय में, शनैश्चर के दिन पूर्व दिशा में काल रहता है, और काल के
सम्मुख पाश रहता है, अर्थात् रविवार के दिन दक्षिण में, सोमवार के दिन
आग्नेय में, मंगल के दिन पूर्व में, बुध के दिन ईशान में, बृहस्पति के दिन
उत्तर में, शुक्र के दिन वायव्य में, शनैश्चर के दिन पश्चिम दिशा में पाश
रहता है। ये दोनों रात्रि में इससे विपरीत रहते हैं। जैसे रविवार की रात्रि
में काल दक्षिण में और पाश उत्तर में रहता है। ऐसे ही सोमवार आदि
में भी जानना चाहिए। ये दोनों यात्रा तथा युद्ध में सम्मुख वर्जनीय
हैं ॥ ३५ ॥