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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 151

१४२ मुहूर्तचिन्तामणि
को देखता है या उसी में स्थित है । सातवें भाव का उदाहरण—यथा मेष
लग्न में मिथुन का नवांश है । उससे सातवें धनु के नवांश का स्वामी बृहस्पति
कर्क में स्थित रहकर अपने नवांश को नहीं देखता और लग्न से सातवें तुला
भाव को देखता है या उसी में स्थित है । इस कही हुई रीति से विपरीत
अशुभ होता है यदि पूर्वोक्त नवांशों के स्वामी पूर्वोक्त नवांशों को या भावों
को न देखते हों और न उनमें स्थित हों तो वर और कन्या की मृत्यु
होती है ॥ ७६ ॥
लग्न से सातवें भाव की शुद्धि
लवेशो लवं लग्नपो लग्नगेहं प्रपश्येन्मिथो वा शुभं स्याद्वरस्य ।
लवद्यूनपोंऽशं द्युनं लग्नपोऽस्तं मिथो वेक्षते स्याच्छुभं कन्यकायाः ॥ ७७ ॥
अन्वयः—लवेशः लवं, (तथा) लग्नपः लग्नगेहं वा मिथः (यदि) प्रपश्येत् (तदा)
वरस्य शुभं स्यात् । लवद्यूनपः अंशं द्युनं लग्नपः अस्त वा मिथः ईक्षते (तदा) कन्यकायाः
शुभं स्यात् ॥ ७७ ॥
नवांश का स्वामी नवांश को और लग्न का स्वामी लग्न को देखता हो
अथवा दोनों परस्पर देखते हों, अर्थात् नवांश का स्वामी लग्न को और लग्न
का स्वामी नवांश को देखता हो तो वर का शुभ होता है और यदि लग्न के
नवांश से सातवें नवांश का स्वामी लग्न से सातवें भाव के नवांश को और
लग्न से सातवें भाव का स्वामी लग्न से सातवें भाव को देखता हो अथवा
दोनों परस्पर देखते हों, अर्थात् नवांश का स्वामी भाव को और भाव का
स्वामी नवांश को देखता हो तो कन्या का शुभ होता है ॥ ७७ ॥
अन्य प्रकार से लग्न और सातवें भाव की शुद्धि
लवपतिशुभमित्रं वीक्षतेंऽशं तनुं वा
परिणयनकरस्य स्याच्छुभं शास्त्रदृष्टम् ।
मदनलवपमित्रं सौम्यमंशं द्युनं वा
तनुमदनगृहं चेद्वीक्षते शर्म वध्वा ॥ ७८ ॥
अन्वयः—लवपतिशुभमित्रं अंशं तनुं वा यदि वीक्षते तदा परिणयनकरस्य शास्त्रदृष्टं
शुभं स्यात् । सौम्यं मदनलवपमित्रं चेत् अंशं द्यूनं वा तनुमदनगृहं वीक्षते चेत् [तदा]
वध्वाः शर्म [शुभं] स्यात् ॥ ७८ ॥
लग्न के नवांश के स्वामी का मित्र होकर शुभग्रह, यदि नवांश को या
लग्न को देखता हो तो वर को शुभ होता है और लग्न के नवांश से सातवें