मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३८ | मुहूर्त्तचिन्तामणि
पर शुभ या अशुभ कोई अन्य ग्रह स्थित हो तो पूर्वोक्त दश योगों में से यह
योग अति अशुभकारक होता है और यदि दूसरे छोर पर कोई ग्रह न स्थित
हो तो अशुभकारक नहीं होता। उदाहरण—यथा पूर्वोक्त दश योगांकों में से
दस संख्यावाला अङ्क है। इसके दो भाग किये तो पाँच पाँच हुए। एक स्थान
में चौदह और मिलाया तो उन्नीस हुए। अब अश्विनी से गिना तो उन्नीसवाँ
मूल नक्षत्र हुआ और उन्हीं पूर्वोक्त दश योगों में से गेरह संख्यावाला योग
है तो यहाँ एक और मिलाया तो बारह हुए। इनके दो भाग किये तो छः छः
हुए। एक स्थान में चौदह और जोड़ा तो बीस हुए। अश्विनी से लेकर गिना
तो बीसवाँ पूर्वाषाढ़ नक्षत्र हुआ। इन सम और विषम दोनों अङ्कों से आये
हुए मूल और पूर्वाषाढ़ नक्षत्रों में से मूल नक्षत्र को आदि में लिखकर चक्र
को स्पष्ट करता हूँ।
मू०...........................................................................................पू०
ज्ये०........................................................................................उ०-शु०
अ०...........................................................................................अ०
वि०...........................................................................................श्र०
के०-स्वा०.....................................................................................ध०-सू० बु०
श०चं०-चि०....................................................................................श०
ह०............................................................................................पू०
उ०............................................................................................उ०
पू०............................................................................................रे० बु०
म०...........................................................................................अ०-मं० रा०
आश्ले०.........................................................................................भ०
पू०............................................................................................कृ०
पु०............................................................................................रो०
आ०...........................................................................................मृ०
इस चक्र की छठी रेखा के एक छोर पर चित्रा नक्षत्र है। उसमें चन्द्रमा
स्थित है और दूसरे छोर पर शतभिष नक्षत्र है उसमें कोई भी ग्रह नहीं
है। इस कारण चन्द्रमा का किसी ग्रह के साथ परस्पर वेध नहीं है। इस
चित्रा नक्षत्र में यदि विवाह हो तो पूर्वोक्त दश योग दोष अशुभकारक नहीं
हो सकता। इस दश योग का बाधक योग व्यासजी ने कहा है कि यदि
विवाह लग्न शुक्र या बृहस्पति से दृष्ट वा युक्त हो तो दश योग नष्ट हो
जाता है ॥७१॥