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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 125

११६ मुहूर्तचिन्तामणि
नक्षत्र और राशि एक वा भिन्न होने में विशेष
राश्यैक्ये चेद्भिन्नमृक्षं द्वयोः स्यान्नक्षत्रैक्ये राशियुग्मं तथैव ।
नाडीदोषो नो गणानां च दोषो नक्षत्रैक्ये पादभेदे शुभं स्यात् ॥ ३६ ॥
अन्वयः—द्वयोः (कन्यावरयोः) राश्यैक्ये चेत् भिन्नं ऋक्षं तथैव नक्षत्रैक्ये राशियुग्म
स्यात् तदा नाडीदोषो नो च गणानां दोषो नो (भवेत्) । तथा नक्षत्रैक्ये पादभेदे
(सति) शुभं स्यात् ॥ ३६ ॥
यदि कन्या और वर की जन्मराशि एक हो और जन्मनक्षत्र भिन्न भिन्न
हों, अथवा जन्मनक्षत्र एक हो और जन्मराशि भिन्न भिन्न हों तो नाड़ीदोष,
गणदोष और तारादोष नहीं होता । एक राशि और भिन्न नक्षत्र का
उदाहरण—शतभिष नक्षत्र में कन्या का जन्म और पूर्वाभाद्रपद के तीन पाद
के अन्तर वर का जन्म हो तो नक्षत्र भिन्न भिन्न है और कुम्भ राशि एक
ही है । एक नक्षत्र और भिन्न राशि का उदाहरण—पूर्वाभाद्रपद के तीन पाद
के अन्तर कन्या का जन्म और चौथे पाद में वर का जन्म हो तो नक्षत्र एक
ही है और राशि कुम्भ और मीन दो हैं । एक नक्षत्र और भिन्न पाद का
उदाहरण—भरणी नक्षत्र के प्रथम पाद में वर का जन्म और द्वितीय पाद में
कन्या का जन्म हो तो एक राशि और नक्षत्र होने पर भी शुभ है ॥ ३६ ॥
राशियों के स्वामी
कुजशुक्रसौम्यशशिसूर्यचन्द्रजाः कविभौमजीवशनिसौरयो गुरुः ।
इह राशिपाः क्रियमृगास्यतौलिकेन्दुभतो नवांशविधिरुच्यते बुधैः ॥ ३७ ॥
अन्वयः—इह कुजशुक्रसौम्यशशिसूर्यचन्द्रजाः कविभौमजीवशनिसौरयः गुरुः (क्रमेण)
राशिपाः (ज्ञेयाः) (तथा) क्रियमृगास्यतौलिकेन्दुभतः नवांशविधिः बुधैः उच्यते ॥ ३७ ॥
मेष राशि का मंगल, वृष का शुक्र, मिथुन का बुध, कर्क का चन्द्रमा,
सिंह का सूर्य, कन्या का बुध, तुला का शुक्र, वृश्चिक का मंगल, धनु का
बृहस्पति, मकर और कुम्भ का शनैश्चर और मीन राशि का बृहस्पति
स्वामी है ॥ ३७ ॥
राशीश-चक्र

राशिमे०वृ०मि०क०सिं०कं०तु०वृ०ध०म०कुं०मी०
स्वा०मं०शु०बु०चं०सूर्यबु०शुक्रमं०बृ०श०श०बृ०