मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११४ मुहूर्त्तचिन्तामणि
दुष्ट गणकूट, भकूट और ग्रहकूट का परिहार
मैत्र्यां राशिस्वामिनोरंशनाथद्वन्द्वस्यापि स्याद्गणानां न दोषः ।
खेटारित्वं नाशयेत्सद्ग्रहकूटं खेटप्रीतश्चापि दुष्टं भकूटम् ॥ ३३ ॥
अन्वयः—राशिस्वामिनोः मैत्र्यां, अपि वा अंशनाथद्वन्द्वस्य मैत्र्यां सत्यां गणानां
दोषः न स्यात् । सद्ग्रहकूटं खेटारित्वं नाशयेत् । तथा खेटप्रीतिः अपि दुष्टं भकूटं
नाशयेत् ॥ ३३ ॥
कन्याजन्मराशि के स्वामी और वरजन्मराशि के स्वामी की, तथा कन्या-
जन्मराशि के नवांश के स्वामी और वरजन्मराशि के नवांश के स्वामी की
परस्पर मित्रता हो तो गणदोष नहीं होता, और यदि सद्ग्रहकूट हो अर्थात्
कन्याजन्मराशि से वर की जन्मराशि अथवा वरजन्मराशि से कन्या की
जन्मराशि गेरहवीं, तीसरी, दसवीं, चौथी या सातवीं हो तो कन्याजन्म-
राशीश और वरजन्मराशीश की शत्रुता का नाश कर देता है। यदि कन्या-
जन्मराशीश और वरजन्मराशीश की परस्पर मित्रता हो तो वह पूर्वोक्त
षट्काष्टकादि दुष्ट भकूट का नाश करती है ॥ ३३ ॥
आठ कूटों में सबसे प्रधान नाड़ीकूट
ज्येष्ठारौद्रार्यमाम्भः पतिभयुगयुगं दास्रभं चैकनाडी
पुष्येन्दुत्वाष्ट्रमित्रान्तकवसुजलभं योनिबुध्न्ये च मध्या ।
वात्वग्निव्यालविश्वोडुयुगयुगमथो पौष्णभं चापरा स्याद्
दम्पत्योरेकनाड्यां परिणयनमसन्मध्यनाड्यां हि मृत्युः ॥ ३४ ॥
अन्वयः ज्येष्ठारौद्रार्यमाम्भःपतिभयुगयुगं दास्रभं च एकनाडी । पुष्येन्दुत्वाष्ट्र-
मित्रान्तकवसुजलभं योनिबुध्न्ये च मध्या नाडी । वात्वग्निव्यालविश्वोडुयुगयुगं पौष्णभं
च अपरा नाडी स्यात् । एकनाड्यां दम्पत्योः परिणयनं असत् स्यात् । मध्यनाड्यां हि
मृत्युः स्यात् ॥ ३४ ॥
ज्येष्ठा, आर्द्रा, उत्तराफाल्गुनी और शतभिष, ये दो-दो नक्षत्र अर्थात्
ज्येष्ठा-मूल, आर्द्रा-पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी-हस्त, शतभिष-पूर्वाभाद्रपद और
अश्विनी, इन नव नक्षत्रों की आदिनाडी है। पुष्य, मृगशिरा, चित्रा,
अनुराधा, भरणी, धनिष्ठा, पूर्वाषाढ़, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराभाद्रपद, इन नव
नक्षत्रों की मध्यनाडी है । स्वाती, कृत्तिका, आश्लेषा, उत्तराषाढ़ ये दो-दो
नक्षत्र अर्थात् स्वाती-विशाखा, कृत्तिका-रोहिणी, आश्लेषा-मघा, उत्तराषाढ़-
श्रवण और रेवती इन नव नक्षत्रों की अन्त्यनाडी है ।