मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशुभाशुभप्रकरण ३
नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा—ये प्रतिपदा से पञ्चमी पर्यन्त, षष्ठी से
दशमी पर्यन्त और एकादशी से पूर्णमासी पर्यन्त तिथियों की संज्ञा हैं,
अर्थात् प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी—इनकी नन्दा संज्ञा; द्वितीया, सप्तमी,
द्वादशी—इनकी भद्रा संज्ञा; तृतीया, अष्टमी, त्रयोदशी—इनकी जया संज्ञा;
चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी—इनकी रिक्ता संज्ञा और पञ्चमी, दशमी, पूर्णमासी
और अमावस—इनकी पूर्णा संज्ञा है। ये तिथियाँ क्रम से शुक्लपक्ष में अच्छे
कार्य के लिए अधम, मध्यम, उत्तम और कृष्णपक्ष में उत्तम, मध्यम, अधम
हैं, अर्थात् शुक्लपक्ष की प्रतिपदा अधम, षष्ठी मध्यम, एकादशी उत्तम और
कृष्णपक्ष में प्रतिपदा उत्तम, षष्ठी मध्यम, एकादशी अधम है। ऐसे ही भद्रा
आदि तिथियों में भी जानना चाहिए और यही तिथियाँ क्रम से शुक्र, बुध,
मंगल, शनैश्चर, बृहस्पति इनके दिनों में हों, अर्थात् शुक्र के दिन नन्दा, बुध
के दिन भद्रा, मङ्गल के दिन जया, शनैश्चर के दिन रिक्ता और बृहस्पति के
दिन पूर्णा हो तो किये हुए कार्य की सिद्धि करनेवाली होती हैं। इस कारण
सिद्धा भी नाम है ॥ ४ ॥
नन्दादितिथिसंज्ञाचक्रम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ |
|---|---|---|---|---|
| ६ | ७ | ८ | ९ | १० |
| ११ | १२ | १३ | १४ | १५<br>३० |
| नन्दा | भद्रा | जया | रक्ता | पूर्णा |
| शु० | बु० | मं० | श० | बृ० |
| सिद्धा | मिद्धा | सिद्धा | सिद्धा | सिद्धा |
सूर्यादि वारों में निषिद्ध तिथि और निषिद्ध नक्षत्र
नन्दा भद्रा नन्दिकाख्या जया च रिक्ताभद्रापूर्णसंज्ञाऽधमार्कात् ।
याम्यं त्वाष्ट्रं वैश्वदेवं धनिष्ठाऽर्यम्णं ज्येष्ठान्त्यं रखेर्दग्धभं स्यात् ॥ ५ ॥
**अन्वयः—**अर्कात् (क्रमेण) नन्दा, भद्रा, नन्दिकाख्या, जया, रिक्ता, भद्रा, पूर्णसंज्ञा
अधमा स्यात् । च (पुनः) रवेः याम्यं, त्वाष्ट्रं, वैश्वदेवं, धनिष्ठा, अर्यम्णं, ज्येष्ठा,
अन्त्यं (क्रमेण) दग्धभं स्यात् ॥ ५ ॥
सूर्यादि वारों में नन्दा, भद्रा, नन्दा, जया, रिक्ता, भद्रा, पूर्णा ये
तिथियाँ क्रम से मृतसंज्ञक हैं, अर्थात् रविवार को नन्दा, सोमवार को भद्रा,