मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाहप्रकरण ९९
उसी मुहूर्त्त में करे । किन्तु विना शान्ति किये यदि उक्त कर्म किये जाते हैं,
तो शुभ नहीं होता ॥ ५८ ॥
छुरिकाबन्धन मुहूर्त्त
विचैत्रव्रतमासादौ विभौमास्ते विभूमिजे ।
छुरिकाबन्धनं शस्तं नृपाणां प्राग्विवाह्रतः ॥ ५९ ॥
अन्वयः—विचैत्रव्रतमासादौ,विभौमास्ते, विभूमिजे, नृपाणां विवाह्रतः प्राक् छुरिका-
बन्धनं शस्तम् ॥ ५९ ॥
चैत्रमास; मंगल, बृहस्पति, शुक्र का अस्तकाल और मंगल दिन को
छोड़कर यज्ञोपवीत में कहे हुए मास, पक्ष, तिथि, नक्षत्र, वार लग्नादि में
क्षत्रियों को विवाह से पहिले छुरिकाबन्धन शुभ होता है ॥ ५९ ॥
केशान्तकर्म का मुहूर्त्त
केशान्तं षोडशे वर्षे चौलोक्तदिवसे शुभम् ।
व्रतोक्तदिवसादौ हि समावर्त्तनमिष्यते ॥ ६० ॥
अन्वयः—षोडशे वर्षे चौलोक्तदिवसे केशान्तं शुभम् । तथा व्रतोक्तदिवसादौ हि
समावर्त्तनम् इष्यते ॥ ६० ॥
इति मुहूर्त्तचिन्तामणौ संस्कारप्रकरणं समाप्तम् ॥ ५ ॥
जन्म से सोलहवें वर्ष में, मुण्डन में कहे हुए मुहूर्त्त में केशान्तकर्म शुभ
होता है । यह केवल ब्राह्मणों के लिए है क्योंकि क्षत्रियों का बाइसवें वर्ष
और वैश्यों का चौबीसवें वर्ष केशान्तकर्म होता है, यह मनुजी ने कहा है ।
अब समावर्त्तन कर्म का मुहूर्त्त कहते हैं । यज्ञोपवीत में कहे हुए मास,
पक्ष, तिथि, वार, नक्षत्र और लग्नादि में समावर्त्तन कर्म करना शुभ
होता है ॥ ६० ॥
विवाहप्रकरण
—:०:—
भार्या त्रिवर्गकरणं शुभशीलयुक्ता शीलं शुभं भवति लग्नवशेन तस्याः ।
तस्माद्विवाहसमयः परिचिन्त्यते हि तन्निघ्नतामुपगताः सुतशीलधर्माः ॥ १ ॥