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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 106

संस्कारप्रकरण ९७
यदि शुक्र के नवांश में चन्द्रमा, लग्न से पाँचवें वा नवें स्थान में शुक्र
और लग्न में बृहस्पति हो तो बालक चारों वेदों का जाननेवाला होता है।
यदि शनैश्चर के नवांश में चन्द्रमा, लग्न में बृहस्पति और लग्न से पाँचवें वा
नवें स्थान में शुक्र हो तो बालक निर्दय अथवा निर्लज्ज होता है ॥ ५३ ॥
अनध्यायसंज्ञक तिथियाँ
शुचिशुक्रपौषतपसां दिगशिवरुद्रार्कसंख्यसिततिथयः ।
भूतादितत्रितयाष्टमी संक्रमणं च व्रतेष्वनध्यायाः ॥ ५४ ॥
अन्वयः—शुचिशुक्रपौषतपसां मासानां दिगशिवरुद्रार्कसंख्यसिततिथयः, तथा भूतादि-
त्रितयाष्टमी संक्रमणं च व्रतेषु अनध्यायाः (भवन्ति) ॥ ५४ ॥
आषाढ़ शुक्ल दशमी, ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया, पौष शुक्ल एकादशी, माघ
शुक्ल द्वादशी तथा चतुर्दशी, पौर्णमासी, अमावास्या, परीवा, अष्टमी और
सूर्य संक्रान्ति ये सब यज्ञोपवीत में अनध्यायसंज्ञक हैं। इनमें यज्ञोपवीत न
करना चाहिए ॥ ५४ ॥
प्रदोष-लक्षण
अर्कतर्कत्रितिथिषु प्रदोषः स्यात्तदग्रिमैः ।
रात्र्यर्थसार्धप्रहरयाममध्ये स्थितैः क्रमात् ॥ ५५ ॥
अन्वयः—अर्कतर्कत्रितिथिषु रात्र्यर्थसार्धप्रहरयाममध्ये स्थितैः तदग्रिमैः प्रदोष
स्यात् ॥ ५५ ॥
द्वादशी में आधी रात से पूर्व ही यदि त्रयोदशी का योग हो तो वह
प्रदोष, छठि में डेढ़ पहर रात बीतने के पूर्व ही यदि सप्तमी का योग हो तो
वह प्रदोष और तीज में पहर भर रात बीतने के पूर्व ही यदि चौथ का योग हो
तो वह प्रदोष कहा जाता है ॥ ५५ ॥
ब्रह्मौदन के पहिले उत्पात होने पर शांति का विधान
प्राग् ब्रह्मौदनपाकाद् व्रतबन्धानन्तरं यदि चेत् ।
उत्पातानध्ययनोत्पत्तावपि शान्तिपूर्वकं तत्स्यात् ॥ ५६ ॥
अन्वयः—व्रतबन्धानन्तरं, ब्रह्मौदनपाकात् प्राग् यदि चेत् उत्पातानध्ययनोत्पत्तौ
अपि शान्तिपूर्वकं तत् (ब्रह्मौदनं) स्यात् ॥ ५६ ॥
विधिपूर्वक यज्ञोपवीत होने के पश्चात् और सायंकाल में होनेवाले