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सर्वकोश
मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)

मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)

Mrigendra Tantra / Agama with Narayanakantha Vritti

महर्षि मृगेन्द्र (टीकाकार: भट्ट नारायणकण्ठ) द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

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“प्रणमत शिवनाथं शाश्वतं शर्महेतो-
रितरविषयसेवादुर्ग्रहं प्रोज्झ्य यत्नात् ।
न स भवति भवेऽस्मिन्नापि भूतो न भावी
तदितरनुतितो यः शर्मयुक्तः पुमान्स्यात् ॥”
भट्टरामकण्ठस्य