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सर्वकोश
मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)

मृगेन्द्र आगम: विद्या एवं योग पाद (भट्ट नारायणकण्ठ वृत्ति सहित प्राचीनतम कामिक आगम परिशिष्ट)

Mrigendra Tantra / Agama with Narayanakantha Vritti

महर्षि मृगेन्द्र (टीकाकार: भट्ट नारायणकण्ठ) द्वारा

DevanagariSanskritpublished448 पृष्ठ

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योगपादे
शुद्धयः।
पृ० पं० अशुद्धिः शुद्धिः
२ ५ पुत्रादिना पुत्रकादिना
,, १६ पुत्रस्य पुत्रकस्य
३ ८ पुत्रसमयि पुत्रकसमयि
१७ ३ प्रकर्षणे प्रकर्षेण
३१ १५ मने चिते मने जिते
,, १६ कण्ठकास कण्टकास
४० ७ देष्ट्रं भूमिकां विरचयति । देष्टुं भूमिकां विरचयति