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सर्वकोश
मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मृच्छकटिकम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mricchakatikam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाराज शूद्रक / पं. जयशंकर लाल त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 10, कुल 760 में से

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विषयानुक्रमणी

प्राक्कथनक
सम्पादकीयग
विषयानुक्रमणीङ
भूमिका१
मृच्छकटिक का रचयिता४
शूद्रक९
शूद्रक के विषय में ऐतिहासिक उल्लेख१०
साहित्यिक उल्लेख१२
मृच्छकटिक का रचना काल१२
शूद्रक का परिचय१५
शूद्रक का निवास स्थान१५
शूद्रक की रचनाएँ१५
मृच्छकटिक का मूल स्रोत१५
मृच्छकटिक नामकरण का अभिप्राय१६
मृच्छकटिक एक प्रकरण (रूपकविशेष) है१८
मृच्छकटिक का संक्षिप्त कथानक१९
पात्रों का चरित्र-चित्रण३४
चारुदत्त३४

( व्यक्तित्व, परम उदार, अतिशय दयालु, शरणागत-रक्षक, सत्यवक्ता, धर्माचारपरायण, प्रतिष्ठा-प्रेमी, कला-प्रेमी, आदर्श-प्रेमी, पत्नी का महत्त्व समझने वाला, पुत्रस्नेही, आदर्शमित्र, चारुदत्त की निर्धनता, भाग्यवादी, उपसंहार )

वसन्तसेना४३

( व्यक्तित्व, वेश्या की अपेक्षा गणिका का महत्त्व, अतुलवैभवशाली निर्लोभता, अतिप्रतिभाशाली, चारुदत्त से अटूट प्रेमभावना, धूता के प्रति आदर भावना, रोहसेन के प्रति वात्सल्य, धर्माचरण में प्रवृत्ति, उपसंहार )