मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 99, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ें४० मीराँ-बृहद-पद-संग्रह
१६
म्हारो मनडो लाग्यो हरि सूं, मै आज करूँ अतर सूँ ।
माधोरी मूरति पलक न बिसरूँ, सो ले हिरदै धरूँ ।
आवन कह गये अजहूँ न अये, बिन दरसण मे तरसूँ ।
म्हाँरो जनम सुफल होय, जादिन हरि के चरण परसूँ ।
मीरा के प्रभु दरसण दीज्यो, तन मन अरपण करस्यूँ । ॥४४॥
१७
म्हाँरो मन मोह्यो छै जी स्याम सुजाण ।
माधुरी मूरत सूरत सुन्दरी जाणे कोटिक भान¹ ।
कसूॅमल पाग केसर्यो जामो, सोहै कुडल कान ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, तुम बिन तलफत प्राण । ॥४५॥
१८
बाई, म्हाँरे रावल भेष ।
वे स्याम बहो जटाधारी, अब ही अजन रेख ।
स्वेत बरण रग के कथा पहर्या, भिक्षा मागा देस ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, करहूँ अलख अलेख ॥४६॥+
पाठान्तर १,
बाई, थाराँ नैन रावल भेख ।
बानी श्याम बोहो जटाधारी, अन्जन रेख ।
स्वेत अरुण कंथा बिराजत, माँगत देस ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, करत करत अलेख ।†
१. भानु, सूर्य ।