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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 365 में से

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मतभेद २३
साकडी गली मे म्हारा सतगुरु मिलिया, कैसे फिरूगी अपूठी।
खभ फाड मीराँ कने गरज्जा, दुरजन जलाये अगीठी । †
पाठान्तर ५,
राणा जी म्हाने या बदनामी लागे मीठी।
थारो रमैयो मीरा म्हाने बतावो, नाहि तो भक्ति थारी झूठी ।
म्हारो रमैयो थारे घट मे बिराजे, थांरे हिये की क्यू फूटी ।
प्रेम सहित मै करूगी रसोई, म्हारे गिरधर के भोग लगाई । १
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, रग दियो रग मजीठी' । †
पद की तीसरी पक्ति की अभिव्यक्ति व भाषा शेष पद से सर्वथा
भिन्न पडती है। अन्य पाठान्तरो मे भी ऐसी अभिव्यक्ति नही
मिलती। अत इस पक्ति को तो निश्चित रूपेण प्रक्षिप्त कहा जा
सकता ह।
२२
माई । म्हॉरे साधॉ रो इक्तयार२ है।
साधु ही पीहर, साधु ही सासरो, साँवरिया भरतार ह।
जात पाँत कुल कुटुम्ब कबीला, साधू ही परवार है।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, रमस्याँ साधा री लार३ है ॥२२॥
१ मजीठी। यह रग राजस्थान मे विशेष रूप से बनाया जाता है।
कई विभिन्न वनस्पतियो का रस मिला कर उबाल दिया जाता है। इस खौलते
हुए रस मे ही कपडा भिगो देते हैं । कपडे का रग कुछ कालिमा लिए हुए लाल
हो जाता हैं। साथ ही, बनस्पतियो के कारण, कपडे मे कुछ हल्की सी सुगन्ध
भी हो जाती है। यह रग और सुगन्ध कपडे के चिथडे चिथड़े हो जाने के बाद
भी नही छूटता । अत 'रग दियो रग मजीठी' एक मुहावरा भी बन गया है।
जिस का अर्थ है कि कभी न छूटने वाला रग। २ जोर, दबाव, ३ पीछे।