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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 79

२० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
पाठान्तर १,
अब नहि मानाला म्हे थारी,म्हाने बर मिलि गिरधारी ।
मन कपूर की एक ही गति है, कहा कहू बार हजारी ।
ककर कचन एक गिणत है, गुज मिरच एक सारी ।
अनन्त धणी के सरणे आई, हाथ सुमिरणी धारी ।
जोग लियो जब बाद तजी री, गुर पाया निज भारी ।
साध सगत मेरो मंन राजी, भई कुटूब सू न्यारी ।
क्रोड बार समझावों मोकू, चालूगी बुद्धि हमारी ।
म्हे राणा के परत¹ न रहस्या, कई बार कह कह हारी ।
सौ बातन की एक बात है, अब तो समझ गवारी ।
रतन जडित की टोपी सिर पर, हार कठ को भारी ।
चरण घूंघरा घमस पडत है, “म्हे” कराँ स्याम सू न्यारी ।
लाज सरम तो सभी गुमाई, यो तन चरणा धारी ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरण कमल बलिहारी ।†
उपर्युक्त पद निम्नांकित अन्तर के साथ भी पाया जाता है ।
१ अतिभारी । २. जब बाद तजी री । ३ में भई स्याम की प्यारी ।
पाठान्तर २,
अब तो नही म्हैं थांरी म्हांने, वर मिलिया गिरधारी ।
मन कपूर की एक ही गति है, कहा कहूं बार हजारी ।
ककर कंचन एक गिणत है, गुज मिरच इकंसारी ।
अनन्त धणी के सरणे आई, हाथ सुमिरणी धारी ।
जोग लियो जब सब ही त्याग्यो, गुरु पाया निज भारी ।
साध संगत मेरो दिल राजी, भई कुटुंब सू न्यारी ।
कोटि बेर समझावो मोकूं, चालूगी बुद्धि हमारी ।
म्हैं राणा के परत न जावा, केईं बेर कह हारी ।
१ लौट कर ।