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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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१८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
पाट पटम्बर सब ही मै त्यागा, तज दियो कर रो चूडो ।
मेवा मिसरी मै सब ही त्यागा, त्यागा छै सक्कर बुरो ।
तन की मै आस कबहू नहि कीनी, ज्यूँ रण माहि सूरो ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, वर पायो छै पूरो ।
पाठान्तर ३,
राणा जी थारो देस्ड़लो छै रग रूड़ो ।
राम नाम की भक्ति न भावै, लोग बसै सब कूड़ो ।
मेवा मिठाई मीरा सब ही त्यागे, त्याग्यो छै सान और बुरो ।
गहणो तो गाठो मीरा सब ही त्याग्यो, त्याग्यो छै बैया रो चूड़ो ।
साल दुसाला मीरा सब सोई त्याग्या, सिर पर बांध्यो छै जूडो ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, बर पायो छै मीरा रूडो ।
पाठान्तर ४,
देसडलो रूड़ो रूडो, राणा जी थांरो देसडलो ।
भगत न भावै म्हारा राम की, लोग बसै सब छै कूड़ो ।
मेवा मिसरी सब ही त्याग्या, त्याग दियो छै बुरो ।
तन की आस कबहू नहि कीनी, ज्यूँ रण माहि सूरो ।
भाई मात कुटुम्बी त्याग्यो, त्याग दियो छै चूडो ।
घूँघट को पटि दूर कियो, सरि बाध्यौ छै जूड़ो ।
यो ससार भव दुख को सागर, मै हाकीयौ दूरो ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, वर पायो छै पूरो ।
यह पाठ भटनागर जी द्वारा किसी दादू पथी सत के सग्रह से
प्राप्त हुआ ।
१८
राणौ जी मेवाडो म्हांरे दाय न आवै ।
गिरधर मो मर्न भाया भोलि माय ।