मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
२ पद्माबाई, ३ गंगाबाई और ४ राज बाई। प्रसिद्ध ऐतिहासिक गह
लोत जी के अनुसार मीराँ की एक ननद का डूगरगढ ब्याहा जाना सिद्ध
होता है। अद्यावधि प्राप्त इतिहास के आधार पर उपर्युक्त पदो को
प्रामाणिक मानना सम्भव नही।
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अब मीराँ मान लीजो म्हारी , हो जी थाने सखिया बरजे सारी।
राणा बरजे, राणी 'बरजे, बरजे सब परिवारी।
कुवर पाटवी सो भी-बरजे, और सहेल्या सारी।
सीस फूल सिर ऊपर सोहै, बिदली शोभा भारी।
साधन के ढिग बैठ बैठ के, लाज गमाई सारी।
नित प्रति उठि नीच घर जाओ, कुल को लगाओ गारी।
बडा घरा की छोरू कहावो, नाचो दे दे तारी।
वर पायो हिंदुवाणे सूरज, इब दिल मे काई धारी।
तार्यो पीहर, सासरो तार्यो, माय मोसाली तारी।
मीराँ ने सद्गुरु मिलिया जी, चरण कमल बलिहारी ॥१४॥।
पदाभिव्यक्ति के आधार पर यह स्पष्ट नही होता कि यह संवाद
किस के साथ हो रहा है। प्रथम दो पंक्तियो की अभिव्यक्ति अवश्य
ही कुछ नई सी प्रतीत होती है। परन्तु अन्य पंक्तियों को देखने से ऐसा
ही प्रतीत होता है कि ऊदाँ-मीराँ सवाद की भावनाओ की ही पुन-
रुक्ति हुई है। इतने अधिकारपूर्ण ढंग से विरोध किसी प्रभावशाली
निकट संबधी द्वारा ही संभव है। बहुत सम्भव है कि यह सवाद भी
ऊदाँ-मीराँ के बीच हुआ हो।
पद की प्रथम दो पंक्तियाँ विशेष महत्वपूर्ण है। "राणा" और
"राणी" तो विरोध करते ही हैं, इतना ही नही, "कुवर पाटवी सो
भी बरजे"। यह "कुंवर पांटवी" कौन है ? क्या यही भोजराज हे ?
प्राप्त इतिहास बताता है कि मीराँ का संघर्ष वैधव्य के बाद ही प्रारम्भ
॰ १ युवराज ।