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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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मतभेद
राजस्थानी में प्राप्त पद
१
तू मत बरजै माई री, साधाँ दरसन जाती ।
राम नाम हिरदै बसै, माहिले मदमाती ।
माई कहै सुन धीहड़ी, काहे गुण फूली ।
लोक सोवै सुख नीदड़ली, थे कथूँ रैणज भूली ।
गेली दुनियाँ बावली, ज्याँकूँ राम न भावै ।
ज्याँ रे हिरदै हरि बसै, त्याँ कूँ नीद न आवै ।
चौबास्याँ की बावड़ी, ज्याँ कूँ नीर न पीजै ।
हरि नारे अमृत झरै, ज्याँ की आस करीजै ।
रूप सुरगा राम जी, मुख निरखत जीजै ।
मीराँ व्याकुल विरहणी, अपनी कर लीजै ॥१॥†
उपर्युक्त पद मे "माहिले" के स्थान मे "म्हाँरे" होना युक्तियुक्त
है, क्योकि "माहिले" जैसा कोई शब्द हिन्दी या राजस्थानी मे नही है ।
२
मीराँ . माई, म्हाँने सुपणे मे परण गया जगदीस ।
सोती को सुपणा आविया जी, सुपणा बिस्वाबीस¹ ।
माँ गेली² दीखे मीरा बावली, सुपणा आल जंजाल ।
मीराँ माई, म्हाँने सुपणे मे, परण गया गोपाल ।
१ शुभ, २ पागल,