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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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ग
राजस्थानी, गुजराती और ब्रज के अतिरिक्त मीराँ के नाम से उपलब्ध
पदो मे पजाबी, पूर्वी और खडी बोली का मिश्रण इसी कारण मिलता है।
पदो के इन मिश्रित, विकृत और परिवर्तित रूपो मे मीराँ के प्रामाणिक
पद ढूँढ निकालना असम्भव-सा प्रतीत होता है।
परतु मीराँ के नाम से उपलब्ध पदो मे भाषा-सम्बन्धी मिश्रण,
विकार और विचित्रताओ से भी अधिक उलझन उत्पन्न करनेवाली भाव,
विचार और अभिव्यक्ति की विचित्रताएँ हैं। मीराँ के पदो मे विचार
और अभिव्यक्ति की विचित्रताएँ भी अनेक है। कुछ पदो मे कबीर,
रैदास, दादू आदि सत कवियो की विचार-परम्परा की धारा प्रवाहित
हुई है, कुछ मे नाथ सम्प्रदाय की विविध मान्यताओ का सकेत है, कुछ
पदो मे भागवत पुराण के आधार पर कृष्ण-लीला-सम्बन्धी विचारों और
भावो की अभिव्यक्ति है, कुछ पद विनय और दैन्य भाव के है, कुछ मे
माधुर्य भाव की भक्ति-पद्धति मिलती है और शेष अन्य पदो मे कुटुम्बियो
से सघर्ष की परस्पर विरोधी और असगत बातो का वर्णन मिलता है।
इन सभी को एक ही मीराँ की रचना मान लेना आज के सशय के युग
मे सम्भव नही जान पडता। आज तो हम प्रत्येक कवि की रचना में
एक विशेष प्रकार की विचार-धारा तथा एक विशेष प्रकार की अभिव्यक्ति
की खोज करते हैं और एक ही कवि की रचना मे अनेक प्रकार की
विचार-धारा तथा विविध प्रकार की भावाभिव्यक्ति देखकर समालोचको
के कान खडे हो जाते हैं और उनकी सशय वृत्ति को उडान भरने के लिए
जैसे पख मिल जाते हैं। मीराँ के पदो मे अनेक प्रकार की विचार-धारा
और अभिव्यक्ति देखकर साधारण रूप से यह विचार उठता है कि किसी
एक विशेष विचार-धारा और एक विशेष प्रकार की भावाभिव्यक्ति वाले
पद मीराँ की प्रामाणिक रचनाएँ हैं और शेष सभी पद प्रक्षिप्त और
अप्रामाणिक हैं।
मीराँ के पदो की प्रामाणिकता पर विचार करने के लिए, सुविधा
की दृष्टि से, उनके उपलब्ध पदो को प्रतिपाद्य विषय के अनुसार दो भागो
मे बॉट लेना होगा। मीराँ की जीवन-सम्बन्धी सामग्री प्रस्तुत करने वाले
पद, जिनमे कुटुम्बियो से सघर्ष की अभिव्यक्ति मिलती है, पर्याप्त
सख्या मे मिलते है। उनकी प्रामाणिकता के सम्बंध मे सशय करने के
पर्याप्त कारण हैं। इन पदो मे प्राय एक ही बात कितने ही पदो में