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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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संतमत-प्रभाव द्योतक पद
राजस्थानी में प्राप्त पद
१
ग्यान कूं बाण वसी हो, म्हाँराँ सतगरु जी हो।
बखतर फूटी हिय, भीतर चालि खुसी।
बाहरि घाव दीसत नही कोई, उरि बीच पूरि खसी।
तन तरवारि भालिका भालका, सबदी की बरछी धसी।
राम दिवानी मै तो पलक न बीसारूँ, जणि' र करावो (जगमे) हँसी,
॥५५६॥†
पदाभिव्यक्ति मे असंगति है। साथ ही पदाभिव्यक्ति से यह भी
नही आभासित होता कि पद मीराँ रचित ही है।
२
बड़े घर ताली लागी रे, म्हाँराँ मन री डनारथ भागी रे।
छीलरिये म्हाँरो चित्त नही रे, डाबरिये कुण जाब।
गगा जमुना सो काम नही रे, मै तो जाय मिलूँ दरियाव।
हाल्या मोल्याँ सूं काम नही रे, सीख नही सरदार।
कामदाराँ सूं काम नही रे, लोहा चढे सिर भार।
कामदाराँ सूं काम नही रे, मै तो जवाब करूँ दरबार।
काचा कथीर सूं काम नही रे, म्हाँरो हीरा को व्योपार।
सोना रूपाँ सूं काम नही रे, लोहा चढे सिर भार।
भाग हमारो जागियो रे, भयो समद सूं सीर।
अमृत प्याला छाडि के, कुण पीवै कडवो नींर।
पापी कूं प्रभु परचो दियो, दियो रे खजानो पूर।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, धणी मिल्या छै हजूर ॥५५७॥†