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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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नाथ-प्रभाव द्योतक पद ३०३
ब्रजभाषा में प्राप्त पद
१
जोगिया मेरे तेरी ।
मनसा वाचा करमणा, प्रभु, पुरवौ मेरी ।
मै पतिवरत पीव की, हो मोल लयी चेरी ।
तुम बिन कोई दूजो देवा, सुपनै नहि हेरीं ।
माता पिता सुत बधु द्वारा, औँ पाँव मे बेरी ।
तुम बिन कोऊ नाही मेरो, प्रगट कहूँ टेरी ।
एक बिरियाँ१ मेरे नगर, दे जावो फेरी ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, राखो चरण मेरी ॥५४८॥
२
जोगिया री सूरत मन मे बसी ।
नित प्रति ध्यान धरत हूँ दिल मे, निसि दिन होत कुसी ।
कहा करूँ, कित जाऊँ मोरी सजनी, मानो सरप डसी ।
मीराँ कहै प्रभु कबर मिलोगे, प्रीति रसीली बसी ॥५४९॥
३
जोगिया जी, तू कब रे मिलोगे आई ।
तेरे ही कारण जोग लियो है, घर घर अलख जगाई ।
दिवस न भूख, रैण नही निद्रा, तुम बिन कछु न सुहाई ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, मिल कर तपत बुझाई ॥५५०॥
४
जोगिया से प्रीत किया दुख होई ।
प्रीत कियाँ सुख न मोरी सजनी, जोगी मीत न कोई ।
राति दिवस कल नाहि परत है, तुम मिलिया बिन मोइ ।
१ बार।