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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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पृष्ठ 338

२८८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
क्या री भयो जब हरि मुख लागी, बाजत विरह भरी ।
सूरदास प्रभु अब क्या करिये, अधरन लागत री ।
( 'बृहद्राग रत्नाकर' पद १५०, पृष्ठ ४८ )
उपर्युक्त पदो मे भाव और भाषा देखते यही अधिक सम्भव
प्रतीत होता है कि सूरदास का ही पद मीराँ के नाम पर भी चल
पडा हो ।
१०
राधा प्यारी दे डारो जू बसी हमारी ।
ये बसी मे मेरा प्राण बसत है, वो बसी गई चोरी ।
ना सोने की बसी, ना रूपे की, हरे हरे बाँस की पोरी ।
घडी एक मुख मे,घडी एक कर मे,घडी एक अधर धरी ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर चरण कमल पर बरी ॥५१९॥†
पाठान्तर १,
श्री राधे रानी, दे डारो बंसी मोरी ।
जा बसी मै मेरो प्राण बसत है, सो बसी गई चोरी ।
काहे से गाऊँ, काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गैया घेरी ।
मुख से गाओ कान्हा,हाथो से बजाओ,लकुटी से लाओ गैया घेरी ।
हा हा करत तेरे पैया परत हूँ, तरस खाओ प्यारी मोरी ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, बसी लेकर छोडी ।
उपर्युक्त पाठान्तर में पहले पद से कुछ अधिक पक्तियाँ है । साथ
ही इस पाठान्तर की भाषा के क्रिया पदो पर आधुनिक प्रभाव विशेष
विचारणीय है । भाव और भाषा साम्य रखता हुआ एक ऐसा ही पद
'चन्द्र सखी' के नाम पर भी प्रचलित है --
श्री राधे रानी, दे डारो ना बाँसुरी मोरी ।
जा बंसी मे मेरो प्राण बसत है, सो बंसी गई चोरी ।