सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 294, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 294

२४० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
विभिन्न भाषाओं में प्राप्त पद
१
कुबज्या ने जादू डारा री, जिन मोहैं श्याम हमारा ।
झरमर झरमर मेहा बरसे, झुक आये बादल कारा ।
निरमल जल जमुना को छाँडो, जाय पिया जल खारा ।
शीतल छाँय कदम की छोडी, धूप सहा अति भारा ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, बाही प्राण पियारा ॥४११॥†
कही कही प्रथम पक्ति के द्वितीयांश का निम्नांकित पाठान्तर
भी प्राप्त है -- “बिना भाल सुर मारा”।
२
मेरे प्यारे गिरिवरधारी जी, दासी क्यो बिसार डारी ।
द्रोपदी की लाज राखी, सब दुख सो निवारी ।
प्रल्हाद पैज पारी, नृसिंह देह धारी ।
भीलनी के झूठे बैर खाये, कछु जात न बिचारी ।
कुब्जा सो नेह लायो, और गोतम की नारी तारी ।
प्यासी फिरो दरस बिन तलफो, मोहे काहे बिसारी ।
न्यासी फिरो दरस बिन तलफो, मोहे काहे बिसारी ।
मीरा के प्रभु दरसन दीजो, गिरिधर अपनी ओर निहारी ।
॥४१२॥
३
छैल, गैल मत रोकै तू हमारी रे ।
चाल कुचाल चलो जिन चंचल, ऐसी अनीती तैने करमी विचारी रे ।
सखी सग की देखत ठाढी, चरचा करेंगी सब पुरनर नारी रे ।


१ रास्ता ।