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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 235

“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद १७९
कुण१ सखी सू तुम रगराते, हम सू अधिक पियारी।
किरपा कर मोहि दरसण दीज्यो, सब तकसीर बिसारी।
तुम सरणागत परम दयाला, भव जल तार मुरारी।
मीराँ दासी तुम चरणन कों, बार बार बलिहारी। ॥२८२॥
४
वैद को सारो२ नहि रे माई, वैद को नही सारो।
कहित ललिता वैद बुलाऊ, आवैं नन्द को प्यारो।
वो आया दुख नाहि रहैगो, मोहि पतियारो।
वैद आय कर हाथ जो पकड़्यो, रोग है भारो।
परम पुरुष की लहर व्यापी, डस गयो कारो। ॥२८३॥†
इस पद मे मीराँ का नाम कही भी नही आया है। कही कही
निम्नाकित दो और पक्तिया भी उपर्युक्त पद मे ही जुडी मिलती है।
जिसमे “दासी मीरा लाल गिरधर” का प्रयोग हुआ है।
“मोर चन्दो हाथ ले हरि, देत है झारी।
दासी मीराँ लाल गिरधर, विष कियो न्यारी।”
५
अच्छे मीठे चाख चाख, बेर लाई भीलणी।
ऐसी कहा अचाखती ,रूप नही एक रती।
नीच कुल ओछी जात, अति ही कुचालणी।
झूठे फल लीन्हे राम, प्रेम की प्रतीत३ जाण।
हरिजू सो बाँध्यो हेत, बैकुण्ठ मे फूलणी।
ऐसी प्रीत करे सोई, दरस मीराँ तेरे जोई।
पतित पावन प्रभु गोकुल, अहीरणी ॥२८४॥* •
१ कौन, २ बूता, ३ विश्वास।,