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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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१६२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
ध्रुव जी ने लागी, प्रल्हाद जी ने लागी।
द्रोपदी ने सभा मा भीड भागी।
बाई मीराँ के प्रभु गिरधर नागर।
जन्मो जनम नी हू त्यगी। ॥२५७॥†
पदाभिव्यक्ति मे विरोधाभास और पूर्वापर संगति का अभाव
है। कही कही अर्थ संगति भी नही बैठती। अन्तिम दो पक्तियो
की गर्वोक्ति के आधार पर पद का मीराँ विरचित होने मे
सदेह होता है।
६
सुन्दरि स्याम सरीरं म्हार दिल, सुन्दरि स्याम सरीर।
कोई ने भाव भवानी ऊपर, कोई ने वाला पीर।
गगा रे कोई ने जमुना रे कोई ने, कोई ने अडसड तीर।
कोई नी रे हस्ती कोई नी रे घोडा, कोई नी रे म्हैल मन्दीर।
मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर नागर, हरी हलधर केरा बीर ॥२५८॥†
७
नही रे बिसरु हरि अन्तर मां थी नही रे।
जल जमुना ना पाणी रे जाता शिर पर मटकी धरी।
आवतां न जाता मारग बचे अमूलख वस्तु जडी।
आवता न जाता रे वृन्दा रे बन मा चरण तमारी पड़ी रे।
पीला पीताम्बर जरकस जामा, केसर आड करी।
मोर मुकुट ने काने रे कुडल, मुख पर मुरली धरी।
बाई मीराँ कहे प्रभु गिरिधर ना गुण, विट्ठल बर ने बरी ॥२५९॥†
पदार्भिव्यक्ति मे पूर्वापर सबंध और अर्थ संगति का अभाव
है। पद की अन्तिम पंक्ति विचारणीय है। गुजराती मे प्राप्त अधिकाश