सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 211, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 211

समर्पण द्योतक पद १५३
इन राणा से मीराँ का क्या सम्बन्ध था, यह सर्वथा अनिश्चित है ।
बहुत सम्भव हो कि ये राणा जेठ ही रह हो । सम्भव है कि मीराँ
अपने ही प्रति 'जेठ बहू' (प्रथम पाठ मे) की अभिव्यक्ति करती हैं
अर्थात् सब मे बडी बहू ।
“यूँ कहै मीराँ बाईं” जैसी टेक भी विचारणीय है ।
सतमत का प्रभाव इस पद से भी स्पष्ट हो उठता है । “जिग
मारग म्है जास्या” जैसी अभिव्यक्ति ‘गुरु’ और उनके
प्रदर्शित मार्ग के प्रति मीराँ के विशेष अनुराग को ही सिद्ध करती है ।
२
चाला वाही देस, चाला वाही देस ।
कहो कुसम्भी सारी रगावा, कहो तो भगवा भेस ।
कहो तो मोतियन मांग भरावा, कहो तो छिटकावा केस ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, सुणज्यो बिडद नरेस । ।।२३९।।
यह पद विशेष महत्वपूर्ण है । “जिन जिन भेखा म्हारो साहिब
रीझै, सोई सोई भेख धारणा”के लिये उतावली मीराँ स्वय ही यह निश्चित
नही कर पा रही हैं कि आराध्य को कौन रूप स्वीकृत होगा । “कहो तो
मोतियन भगवा भेस ।” सम्भव है कि वैष्णव और
नाथ पथ की विभिन्न परम्पराओ के कारण ही ऐसी अभिव्यक्ति हुई हो ।