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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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मिलन और बधाई १४७
पाठान्तर ४,
माई मै तो लियो है सावरियो मोल ।
कोई कहै सूँघो, कोई कहै मूँहगो (मै तो) लियो ह हीरा सूँ तोल ।
कोई कहै हलका, कोई कहै भारी, (मै तो) लियोरी जाखडिया१तोल
कोई कहै घटतो, कोई बढतो (मै तो) लियो है बराबर तोल ।
कोई कहै कालो, कोई कहै गोरो, (मै तो) देख्यो हे घूँघट पट खोल ।
मीराँ कहै प्रभु गिरिधर नागर, म्हारे पूरब जनमरो कोल ।
पाठान्तर ५,
माई मै तो लियो छै सांवरियो मोल ।
कोई कहै हलको, कोई कहै भारी, (मै तो) लियो छै तराजू तोल ।
कोई कहै सोगो, कोई कहै मैंगो२, (मै तो) लियो छै अमोलख मोल ।
कोइ कहै छानै, कोई कहै चोडे (मै तो) लियो छै बजता ढोल ।
कोई कहै कालो, कोई कहै गोरो (मै तो) लियो छै अखिया खोल ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, (म्हारे) पूरब जनम को कोल ।
स्पष्ट है कि उपर्युक्त सभी पाठ एक ही पद के गेय रूपान्तर मात्र
हे। यद्यपि प्रत्येक पाठ की भाषा किसी एक बोली विशेष के प्रभाव
की द्योतक है तथापि भाव सर्वथा एक ही है।
तत्कालीन समाज के साथ मीराँ के कठोर सघर्ष की भावना
सभी पाठो से व्यक्त होती है। साथ ही सभी पाठो से निन्दा-स्तुति
के प्रति उदासीन मीराँ का आत्मविश्वास और दृढ भक्ति-भाव
“मै तो लियो तराजू तोल” जैसी अभिव्यक्ति से अति स्पष्ट हो उठता है।
शुद्ध ब्रजभाषा के साथ ही साथ राजस्थानी से कुछ प्रभावित
ब्रजभाषा मे भी प्राप्त यह पद और इसके विभिन्न पाठ विशेष
विचारणीय है ।
१ तराजू, २ महँगा।