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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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१४२ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह
३
मेहा बरसवो करे रे, आज तो रमियो मेरे घर रे ।
नान्ही नान्ही बूंद मेघ घन् बरसे, सूखे सखर भरे रे ।
बहुत दिना पै पीतम पायो, बिछुरन को मोहि डर रे ।
मीराँ कहै अति नेह जुडायो, मै लियो पुरबालो बर रे ।॥२२८॥
पद की द्वितीय पक्ति में 'मेघ' और 'घन' दोनो पर्यायवाची शब्दो
के प्रयोग से पुनरुक्ति हुई है।
४
देखी बरषा की सरसाई, मेरे पिया जी के मन आई ।
नान्ही नान्ही बूंदैन बरसन लाग्यो, दामिनी दमके झरलाई ।
स्याम घटा उमडी चहुँ दिसी सो, बोलत मोर सुहाई ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर आणन्द मगल गाई । ॥२२९॥
५
रग भरी रग भरी, रग सूं भरी री,
होली आई प्यारी रग सूं भरी री ।
उडत गुलाल लाल भये बाहर,
पिचकारिन की लगी झरी री ।
चोवा चन्दन और अरगजा,
केसर गागर भरी धरी री ।
मीराँ कहै प्रभु गिरधर नागर,
चेरी होय पायन मे परी री ॥२३०॥
६
बसो मोरे नैनन मे नन्दलाल ।
मोहनि मूरत सावरि सूरत, नैणा बने विसाल ।
अधर सुधारस मुरलि राजति, उर बैजन्ती माल ।