मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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अपने प्रचलित रूप मे तो प्रमाणिक कदापि नही माने जा सकते हैं।
तब भी, सम्पूर्ण प्राप्त सामग्री मे सामञ्जस्य की एक कड़ी सिद्ध होनेवाले
इन पदों की अभिव्यक्ति की सर्वथा अवहेलना भी नही की जा सकती ।
एक मध्य-मार्ग को अपना कर ही इस गम्भीर समस्या का हल निकाला जा
सकता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्राप्त पदाभिव्यक्तियो और प्राप्त सामग्री
की मनोवैज्ञानिक आलोचना ही प्रस्तुत समस्या का एकमात्र हल हो सकती है।
- यहाँ, प्रचलित जनश्रुतियो पर विचार कर लेना भी अप्रासंगिक न
होगा। ऐतिहासिक जनश्रुतियो का नितान्त निराधार रूपेण चल पडना
सम्भव नही प्रतीत होता। सूक्ष्मातिसूक्ष्म आधार को कल्पना और भावना
के आधार पर अतिरजित और अलौकिक बनाया जा सकता है, परन्तु
आधार के नितान्त अभाव में ऐसा सम्भव नही प्रतीत होता, विशेषत
जब विभिन्न पदाभिव्यक्तियो मे कथा एक ही रूप मे मिलती हो। मीराँ की
यात्राओ का मार्ग-निर्देश करने वाली विभिन्न पदाभिव्यक्तियो से एक ही तथ्य
प्रकट होता है । इतना ही नही, प्राप्त भक्त-गाथाएँ, पदाभिव्यक्तियाँ
और जनश्रुतियो का सम्मिश्रण ही हमारे मान्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण
आधार है। अस्तु, इतिहास की सुदृढ रूपरेखा तय्यार करने के लिये
सम्पूर्ण प्राप्त सामग्री की समन्वयात्मक आलोचना अत्यावश्यक हो जाती है।
प्राप्त पदो मे सर्वाधिक सख्या ऐसे पदो की है जिनकी अभिव्यक्ति
वियोगात्मक है। ऐसे कुछ पदो मे सघर्ष की भी अभिव्यक्ति मिलती है
परन्तु अधिकाश पदो से मात्र वियोग ही.लक्षित होता है। वियोग की यह
अभिव्यक्ति अधिकांश सघर्ष-द्योतक पदो मे भी मिलती है। अत प्रस्तुत
पुस्तक मे मतभेद द्योतक पदो के बाद ही वियोग द्योतक पद और तब
संघर्ष द्योतक पद रखे गये हैं, परन्तु प्रस्तुत विवेचना मे इस क्रम को बदल
कर सघर्ष द्योतक पदो की चर्चा पहले ही कर दी गई है क्योकि उपर्युक्त
दोनो भावाभिव्यक्ति द्योतक पदो की विवेचना के कई पहलू सर्वथा एक है
और शेष मे भी गहरा साम्य है।
सघर्ष द्योतक पदो मे प्राप्त वियोगाभिव्यक्तियो मे वह भाव-गाम्भीर्य
नही जो वियोग द्योतक पदाभिव्यक्तियो की विशेषता है। ऐसी पदा-
भिव्यक्तियो से विरह-व्याकुला नारी की सुरुचिपूर्ण भोजन, भवन और
शृङ्गारादि के प्रति गहरी उदासीनता ही लक्षित होती है। नौटकियो की
शैली मे प्राप्त पदो मे भाव-गाम्भीर्य ही कृत्रिम सिद्ध होता ।