मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 190, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ें१३२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
अड़सठ तीरथ सतो ने चरणे, पिया जी, कोटि काशी ने कोटि गंगरे ।
निन्दा करसे तो नरक कुंड मा जशे, पिया जी, थशे आधला अपगरे ।
मीराँ कहै गिरधर ना गुण गायो, पिया जी, सतोनी रझमा शीरसगे रे ।
॥२११॥
३
मै तो छाडी छाडी कुल की लाज, रगीलो राणा काई करसे माणा राज ।
पाव मे बाधूगी घुँघरा, हाथ मे लेऊंगी सितार ।
हरि के चरणो आगे नाचती रे, काई रीझेगो करतार ।
जहेर को प्यालो राणा जी भेज्यो, धरियो मीराँबाई हाथ ।
करि चरणामृत पी गई रे श्री ठाकुर को परसाद ।
राणा जी ये रीस करी भेज्यो, झेरी नाग असार ।
पकड गले बिच डालियो, कांई हो गयो चन्दन हार ।
मीराँ को गिरधारी मिलिया, जनम जनम भरतार ।
मै तो दासी जनम जनम की, कृष्ण कत सरदार ॥२१२॥†
४
गोविन्दो प्राणो अमारो रे, मने जग लाग्यो खारो रे । गोविन्द ।
मने मारो राम जी भावे रे, बीजो मारे नजरो न आवै रे । ,,
मीराँ बाई माँ महल मा रे, हरि संतन नो वास । ,,
कपटी थी हरि दूर बसे, मारा सतन केरी पास । ,,
राणा जी कागज मोकले रे, दो राणी मीराँ ने हाथ । ,,
साधुनी संगत छोड़ि दो, तमो वसो नी हमारे साथ । ,,
मीराँ बाई कागज मोकले रे, दीजो राणा जी ने हाथ । ,,
राज पाट तमे छोड़ी राणा जी, वसो साधु ने साथ । ,,
विष नो प्यालो राणो मोकलिया रे, पीजो मीराँ ने हाथ । ,,
अमृत जानी मीरा पी, जे ने सहाय श्री विश्वनाथ । ,,
साढ़वाला साढ़ शनगारजे रे,-जावुं सो सो रे कोश । ,,