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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 188

१६० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
ऐतिहासिक आधार अद्यावधि प्राप्त नही। कुछ विद्वानो के मतानुसार
मीराँ जैमलकी ही पुत्री ठहरती है, परन्तु इस पहलू के समर्थन मे पर्याप्त
प्रमाण नही मिलते है। पद की छठी पंक्ति मे अर्थ सगति का
अभाव है।
ब्रजभाषा में प्राप्त पद
१
माई री मे सावन्निया जान्यो नाथ।
लेन परचो अकबर आयो, तानसेन ले साथ।
राग तान इतिहास श्रवन करि, नाय नाय सिर माथ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, कीन्ह्यो मोहि सनाथ ॥२०७॥
तानसेन को साथ लेकर मीराँ के पास अकबर के आने की जन-
श्रुति है। परन्तु सामग्री के आधार पर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से ऐसा
होना सम्भव नही। अस्तु, जब तक ऐसे पदो के समर्थन मे कोई विशेष
प्रमाण न मिले इनको प्रक्षिप्त मान लेना ही युक्तियुक्त प्रतीत होता है।
२
मीराँ मगन भई हरि के गुण गाय।
साप पेटारा राणा भेज्या, मीराँ हाथ दियो जाय।
न्हाय धोय जब देखण लागी, सालिगराम गई पाय।
जहर का प्याला राणा भेज्या, अमृत दीन्ह बनाय।
न्हाय धोय जब पीवण लागी हो अमर अचाय।
सूल सेज राणा ने भेजी, दीज्यो मीरा सुलाय।
मीराँ के प्रभु सदा सहाई, राखे विधन हटाय।
भजन भाव मे मस्त डोलती, गिरधर पै बलि जाय ॥२०८॥†
“सूल सेज ˙ ˙ सुलाय” के बाद निम्नांकित एक और पंक्ति
भी कही कंही मिल जाती है।
“साझ भई मीरा सोवण लागी, मानो फूल बिछाय।”