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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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पृष्ठ 186

१२८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
सम्पूर्ण पद में मीराँ का नाम या ऐसी कोई अभिव्यक्ति, जिसव
आधार पर पद मीराँ रचित होना स्पष्ट हो सके, नही है ।
६
यो तो रग धत्ता लाग्यो ए माय ।
पिया पियाला अमर रस का, चढ गई धूप घुमाय ।
या तो अमल म्हारे कबहुँ न ऊतरे, कोटि करो उपाय ।
सांप पिटारो राणा जी भेज्यो, द्यो मेडतणी गल डार ।
हँस हँस मीराँ कठ लैगायो, यो तो म्हारे नौसर हार ।
विष को प्यालो राणा जी भेज्यो, द्यो मेड़तणी प्याय ।
कर चरणामृत पी गई रे, गुण गोविन्दरा गाय ।
पिया पियाला नाम का रे, और न रग सुहाय ।
मीराँ कहै प्रभु गिरिधर नागर, काची रंग उड जाय ।
॥२०५॥†
प्रथम पक्ति का निम्नाकित पाठान्तर भी मिलता है —
“यो तो रग म्हारे श्यामसुन्दर को जनम जनम नहि जाय ।”
पाठान्तर १,
किण विध कहूँ, कहण नही आवै, रह्यो घुमाय घुमाय ।
गुरु प्रताप साध री सगत, हरिजन मिलिया आय ।
किरपा करो तो प्रभु जी ऐसी कीज्यो, दूजी नाही सुहाय ।
राणा जी विषरा प्याला भेज्यो, म्हे सिर ल्यो चढाय ।
चरणामृत को जब लीनो पीगी प्रेम अघाय ।
पीवत ही अति चढी खुमारी, रह गई कहत सुमाय ।
जिन मीराँ की पनवारी कीन्ही, पूरब जनम के भाय ।
पाठान्तर २,
किंण विध कहूँ कहण नही आवै, चढ्यो घुमाय ।
गुरु प्रताप साध री सगत, हरिजन मिलिया आय ।