मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२६ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह
साधू रो सग परो निवररो, थाने करा पटराणी ।
कोट भूप वारा रतन पर, जिनके हाथ बिकाणी ।
हथलेवा मै थास्यूँ जोडयो, गिरधररी पटराणी ।
पीहर म्हारो देस मेडतो, छाडी कुल की काणी ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, चरण कवल लिपटानी ।
उपर्युक्त दोनो पाठान्तर एक दूसरे के गेय रूपान्तर मात्र प्रतीत
होते है ।
सभी पाठो से व्यक्त होती भावना "अपने घर का परदा कर ले,
मै अबला बौराणी" भाव और भाषा दोनो ही दृष्टिकोण से विशेष
विचारणीय है । दूसरी विचारणीय अभिव्यक्ति है "हथलेवी राणा सग
जुहियो, मै गिरधर पटराणी" जो सभी पाठो मे मिलती है । यह पद
और उसके सभी पाठान्तर भाव और भाषा दोनो ही दृष्टिकोण से
विशेष रूप से विचारणीय है ।
३
म्हारा नटनागर गोपाल लाल बिन, कारज कौन सुधारे ।
घूम रह्यो दुरयोधन राजा, जैसे गज मतवारो ।
सिह होय केर हस्ती¹ मारे, बड़ो भरोसो थारो ।
मीराँ ने राणा जी बरजै, मतना जनम बिडारे² ।
थे सगत साध की सीख्या, मत आयो महल हमारे ।
म्हे सगत साध की सीख्या, थांरे कछ्यु³ न सारे⁴ ।
तन मे रीस भई राणा के, उठ खडग ले मारे ।
प्याला मे विष घोल राणा जी, मन मे कपट बिचारे ।
अमृत कर के मीराँ पी गई, जहर सावरों झारे ।
जब जब पीड परी भक्तन पर, आप ही कृष्ण पधारे ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि भक्ताने न्यारे ॥२०२॥†
१ हाथी, २ व्यर्थ खोना, ३ जरा भी, ४ सहारे ।