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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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११८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
गुरू कृपा से सत पधार्या, सता स्याम मिलाया ।
मीराँ की प्रभु आस पुजोई१, गिरिधर सगा आया ॥१९०॥
पदाभिव्यक्ति विशेष विचारणीय है। अन्तिम पंक्ति से आनन्द
ही लक्षित होता है।
२८
राणे जी हट माडचो२ म्हासू,गिरधर प्रीतम प्यारा जी ।
वो तो मद माया रो आधो, थे मत हो ज्यो न्यारा जी ।
साची प्रीत लगी है तुम सूं झक मारो ससारा जी ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर थाने,भक्त पियारा जी ।
॥१९१॥†
२९
राणा जी म्हारे गिरधर प्रीतम प्यारो हो,
राणा जी म्हारे गिरधर प्रीतम प्यारे ।
व्यापक होय रह्यो घट घट मे, है सब ही से न्यारे ।
सबको सरजण हारो, अन्तर घट की सबही जाणे ।
आप तो भेज्या विषरो प्याला दे मीराँ ने मारो ।
कर चरणामृत पी गईं जी, गिरधर संकट टारो ।
जनम जनम रो पति परमेश्वर राणी जी कोन विचारो ।
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, साचो बसंरी वारो ॥१९२॥†
३०
निन्दा म्हारी भलाई करो नै सोने काट न लागै
जोग लियो जग जातौ देख्यौ हरि भजवा के काजै ।
१ परिपूर्ण की, २ बनाया, यहाँ होगा जिद्द की ।