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सर्वकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

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संघर्षाभिव्यक्ति ११३
राजपूतो की भाषा पर, वेशभूषा पर, रहन सहन पर मुगल दरबार का
प्रभाव पडा था। कुछ ऐसे लोकगीतो मे जिनकी अभिव्यक्ति के
आधार पर परवर्त्ती काल का कहा जा सकता है, “सलाम” लिखने
की अभिव्यक्ति मिलती है। इस पाठान्तर की भाषा और शैली के
आधार पर इसको भी गेय रूपान्तर मात्र ही समझना सगत होगा।
पद की अन्तिम पक्ति से व्यक्त होती भावना भी विचारणीय
है। मीराँ के पदों की अभिव्यक्तियो व परम्परागत मान्यताओ दोनो
के ही आधार पर मीराँ का विधवा होना प्रमाणित नही होता।

१८

सिसोद्यो रूठ्यो तो म्हारो काई कर लेसी।
म्हे तो गुण गोविन्द का गास्या हो माई।
राणो जी रूठ्यो वारो देस रखासी।
हरि रूठ्या कुम्हलास्यां हो माई।
लोक लाज की काण न मानूं।
निरभै निसाण घूरास्या हो माई।
राम नाम का झाझ¹ चलास्यां भव सागर तिरजास्या हो माई।
मीराँ सरण सावल गिरधर की, चरण कवल लपटास्या हो माई।
॥१८॥

कही पद की चतुर्थ पंक्ति मे प्रयुक्त “कुम्हलास्या” के बदले
“कठे जास्या” “किये जास्या” या “कोठे जास्या” का प्रयोग भी मिलता
है। “किथे” राजस्थानी भाषा का शब्द नही है और ‘झेठे’ अर्थहीन
प्रतीत होता है। “केंठे जास्या” पाठ असगत भी नही ठहरता तथापि
यह कहना कि “कुम्हलास्यां” या “कठे जास्या” दोनो मे से कौन पाठ
प्रामाणिक है, सम्भव नही।

१ जहाज।
८