मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
संघर्ष दोनो ही पदो से लक्षित होता है, तथापि दोनो ही पदो से विभिन्न
घटनाओ का आभास मिलता है ।
उपर्युक्त पद मे 'चुनरी' लौटा देने की अभिव्यक्ति विशेष महत्वपूर्ण
है क्योकि उससे मीराँ का सधवा होना ही सिद्ध होता है ।
१३
सुत्यो राणा जी निस भर नीद ओ,
कोई सुत्याँ ने सुपोणराणा जी ने आयो ।
साथियो रे भाई करो ए विचार ओ,
साथिडा हो काई म्होरी मेडतणी भगवाँ पहर लियाँ ।
सुपणो राणा जी आल जजाल ओ,
राणा जी पड्योरे जूनागढ रो मारग रे ।
राणा जी कोई दीप उगायो' मीराँ बाई के देस ।
बूझ्या राणा जी गायाँ रो ग्वाल ओ
कोई देस बताओ मीराँबाई रो, ।
ओई राणा जी मेडतणी रो देस,
कोई साल२ थोडा सख्व भोगना३ ओ ।
बूझ्यो राणा जी मालीडारो पूत,
कोई बाग बताओ मीराँ बाई रो,
ओई राणा जी मीराँ बाई रो बाग ।
कोई आम्बू तो पाक्याँ नीबूँ रस भर्या,
सामी मिल गई साधुडा री जमात ।
बीच मे तो मीराँ बाई घूमती ओ राम ।
मीराँ बाई थॉरो बिडद बतलायाँ,
मेडतणी बिडद' बतलायाँ म्हे थांने पूजस्यां ।
१ दीप उगायो—दीप प्रज्ज्वलित किया, भावार्थ—दिन भर चलने के
पश्चात् सायकाल पहुँचे, २ बजर भूमि, ३ भोगने योग्य ।