मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंघर्षाभिव्यक्ति ९९
कर चरणामृत मीराँ पी गई, कोई आप जाणो रघुनाथ ।
साँप पेटारा राणा जी भेज्या, द्यो मीरा ने जाय ।
कर खग वालो मीराँ बाई पहरियो, कोई हो गयो नोसर हार¹ ।
काढ कटारो राणाजी बैठिया, ल्यो मीरा ने मार ।
इन माराँ इन दोष लगे, कोई छत्री धरम धर जाय।
साँड्या² साडिया पलाण³ जो, म्है चालाँ सो सो कोस ।
राणा जी का देस मे, कोई जल पिवा रो दोस ।
मीराँ गिरधर रो रग राची, रँच न रक कलेस ।
अन्तिम पक्ति का निम्नाकित पाठान्तर भी पाया जाता है —
“मुख से बजावै मीराँ बाँसरी, कोई नाच रह्यो-मधुरेस ।”।।१७०।।
राजस्थान के ऊँटो की तीव्र चाल किसी समय विशेष प्रसिद्ध
थी ! मीराँ ने ऊँट जोत लाने के लिये कहा और ऊँट ले आया गया ।
इतने मे ऊँट चलाने वालो ने मुडकर जो देखा तो “मीराँ बाई रो देस”
ही दीखने लगा । ऊँट की तीव्र गति का चमत्कार पूर्ण वर्णन है।
८
ए मीराँ थांरो काई लागै गोपाल ।
राणो जी बूझै बात, काई थारो लागै गोपाल ।
सरप पिटारो राणो जी भेज्या, द्यो मीराँ के हाथ ।
ए मीराँ थारो भायलो गोपाल ।
मीराँ बैठी महल मे जी, छापा तिलक लगाय ।
बतलाया बोली नही रे, राणो जी रहयो बल खाय ।
काड कटारो खड्यो हुयो जी, अब बताय तेरो गोपाल ।
१ नोसर हार—एक तरह का बहुमूल्य हार जो अपनी बहुमूल्यता के कारण
सिर्फ राजघरानो के ही उपयुक्त समझा जाता है, २ ऊँट, ३ ऊँट पर जोते जाने
वाली काठी “पलाण” कहलाती है। इसका क्रिया रूप है “पलाण ज्यो” जिसका
अर्थ है, जोत लो ।