मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवियोगाभिव्यक्ति ६५
घर आवो स्याम मोरे, मैं तो लागूँ पाय तोरे ।
मीराँ को सरण लीजिये, बलि बलि हारिये । ।१९५।।
१५
साँइया, सुण जो अरजै हमारो ।
मया¹ करो महल्या पग धारो, मै खानाजाद तुम्हारी ।
तुम बिन प्राण दुखी दुख मोचन, सुधि बुधि सबै बिसारी ।
तलफ तलफ उठि उठि मग जोऊ, भई ब्याकुलता भारी ।
सेज सिंघ ज्यूँ लागी प्राण कूँ, निस भुजग भई भारी ।
दीषग मनहूँ दूहूँ दिसि लागी, बिरहिन जरत बिचारी ।
जब के गये अजहूँ नही आये, विलम्बे कहा मुरारी ।
मीराँ के प्रभु दरसन दीजो, तुम साहेब हम नारी ।।९६।।
१६
हरि म्हारी सुणजो अरज म्हाराज ।
मै अबला बल नाहि गुसाईं, राखो अबके लाज ।
रावरी होइ के कणी रे जाऊ, है हरि हिवडारो साज ।
हम को वपु हरि देत सधार्यो, साद्यो देवन के काज ।
मीराँ के प्रभु और न कोई, तुम मेरे सिरताज । ।१९७।।
पद की तृतीय पक्ति अर्थहीन है। इस पक्ति का शेष पद से
पूर्वापर सबध भी नही बैठता।
१७
कैसी रितु आई मेरी हियो लरजे, है मा ।
निस अधियारी कारी, बिजरी चमकै, सेज चढता² जिया डरपै,
हे मा।
१ दया, २ चढते हुये ।
५