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सर्वकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

पृष्ठ 52, कुल 395 में से

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२८ मयमतम्
गणितज्ञः पुराणज्ञः आनन्दात्माप्यलुब्धकः।
चित्रज्ञः सर्वदेशज्ञः सत्यवादी जितेन्द्रियः ।।१४।।
अरोगी चाप्रमादी च सप्तव्यसनवर्जितः ।
सुनामा दृढबन्धुश्च वास्तुविद्याब्धिपारगः ।।१५।।
सूत्रग्राही—
स्थपतेस्तस्य शिष्यो वा सूत्रग्राही सुतोऽथवा।
स्थपत्याज्ञानुसारी च सर्वकर्मविशारदः ।।१६।।
सूत्रदण्डप्रमाणज्ञो मानोन्मानप्रमाणवित् ।
तक्षितानां तक्षकेणाप्युपर्य्युपरि युक्तितः ।।१७।।
वर्धकी ( वर्धकि )—
वृद्धिकृद् वर्धकिः प्रोक्तः सूत्रग्राह्यनुगः सदा ।।१८।।
तक्षक—
तक्षणात्स्थूलसूक्ष्माणां तक्षकः स तु कीर्तितः ।।१८।।
मृत्कर्मज्ञो गुणी शक्तः सर्वकर्मस्वतन्त्रकः ।
गुरुभक्तः सदा हृष्टः स्थपत्याद्यनुगः सदा ।।१९।।
शिल्परत्न ( १.२९-३३ ) में वर्णित स्थपति, सूत्रग्राही, तक्षक एवं वर्धकी के
लक्षण वास्तुविद्या में वर्णित लक्षणों के ही सदृश हैं।