सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 395 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 41

चतुर्थोऽध्यायः 卐 भूपरिग्रहः १७
पयसा तु ततः प्राज्ञो निशादौ परिपूरयेत् ।
तस्य कूपस्य चाभ्याशे शुचिर्भूत्वा समाहितः ॥१३॥
भूमौ दर्भावकीर्णायां संविशेत् प्राक्शिरा बुधः ।
बुद्धिमान् मनुष्य को रात्रि के प्रारम्भ में गड्ढे में डालते हुये उसे जल से पूर्ण करना
चाहिये। इसके पश्चात् पवित्र होकर सावधान मन से गड्ढे के पास भूमि पर कुश बिछा
कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाना चाहिये॥१३॥
अयं मन्त्रः—
अस्मिन् वस्तुनि वर्धस्व धनधान्येन मेदिनि! ॥१४॥
उत्तमं वीर्यमास्थाय नमस्तेऽस्तु शिवा भव ।
उपवासमुपक्रामेदेतं मन्त्रं जपंस्ततः ॥१५॥
उपवास करते हुये इस मन्त्र का जप करना चाहिये। मन्त्र इस प्रकार है—हे
पृथिवी, इस भूमि पर उत्तम समृद्धि स्थापित कर इसे धन-धान्य से वृद्धि प्रदान करो।
तुम कल्याणकारी बनो, तुम्हें प्रणाम॥१४-१५॥
❋ उत्तमादिभूलक्षणम् ❋
अह्न आदौ परीक्षेत तं कूपं स्थपतिर्बुधः ।
सावशेषं जलं दृष्ट्वा तद् ग्राह्यं सर्वसम्पदे ॥१६॥
बुद्धिमान् स्थपति को दिन होने पर प्रथमतः उस गड्ढे की परीक्षा करनी चाहिये।
इसमें जल बचा हुआ देख कर सभी प्रकार की सम्पत्तियों के लिये उस भूमि को
निर्माणहेतु ग्रहण करना चाहिये॥१६॥
क्लिन्ने वस्तुविनाशाय शुष्के धान्यधनक्षयः ।
पूरिते तन्मृदा खाते समता मध्यमा मता ॥१७॥
भूमि यदि गीली रहे तो उस पर निर्मित गृह में विनाश होता है। यदि शुष्क रहे
तो उस गृह में धन-धान्य की हानि होती है। यदि उस गड्ढे के खोदने से निकली मिट्टी
से उसे भरा जाय एवं पूरी मिट्टी उसमें समा जाय तो भूमि को मध्यम श्रेणी का समझना
चाहिये॥१७॥
उत्तमा भूर्मृदाधिक्या हीना हीना मृदा मही ।
तन्मध्यावटसन्दृष्टप्रदक्षिणावरोदकाम् ।
सुरभिप्रतिमां भूमिं गृह्णीयात् सर्वसम्पदे ॥१८॥
यदि मिट्टी से गड्ढा भर जाय एवं मिट्टी बच भी जाय अर्थात् मिट्टी अधिक हो तो
मय०-२